Gaza War में Putin का दांव, Trump-Netanyahu के लिए चुनौती

गाजा युद्ध (Gaza War) एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सबसे बड़े मुद्दे के रूप में सामने आ गया है। हालात ऐसे हैं कि अब इस संघर्ष में सिर्फ Israel और Hamas ही आमने-सामने नहीं हैं, बल्कि कई बड़े देश और नेता खुलकर मैदान में उतर चुके हैं। खासकर रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की एंट्री ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने गाजा युद्ध को खत्म करने के लिए एक 20 सूत्री शांति समझौता (Peace Plan) पेश किया था। शुरुआत में कई मुस्लिम देशों ने इसे मानने का संकेत दिया, लेकिन बाद में हालात बदल गए। Hamas ने भी इस प्रस्ताव पर स्पष्ट सहमति नहीं दी और वक्त लेने की रणनीति अपनाई। इसी बीच रूस ने Hamas को खुला समर्थन देकर अमेरिका और Israel के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

Netanyahu का सख्त रुख और Israel का जवाब

गाजा युद्ध (Gaza War) में Israel अब पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कर दिया है कि Hamas को खत्म किए बिना युद्ध विराम संभव नहीं है। हाल के दिनों में Gaza पर Israel के हमले और भी तेज हो गए हैं।

शुक्रवार और शनिवार को Gaza की कई बहुमंजिला इमारतें मलबे में बदल गईं। आम नागरिकों पर इसका बड़ा असर पड़ा है। जमीन से टैंकों और हवा से फाइटर जेट्स के बजाए अब Israel तेज़ और सटीक हमले कर रहा है। Netanyahu ने अपने बयान में कहा कि Israel अब किसी भी नियम या दबाव के अधीन नहीं रहेगा।

Trump का Peace Plan और मुस्लिम देशों का बदलता रुख

Donald Trump ने गाजा युद्ध (Gaza War) को खत्म करने के लिए जो शांति समझौता पेश किया, उस पर शुरुआत में पाकिस्तान, क़तर, तुर्की और कई खाड़ी देशों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। लेकिन धीरे-धीरे तस्वीर बदल गई।

  • Pakistan ने आरोप लगाया कि Trump ने जिस समझौते पर सहमति जताई थी, उसे बाद में बदल दिया गया। इस वजह से पाकिस्तान ने पीछे हटने का फैसला किया।
  • Qatar ने कहा कि अगर Hamas को शामिल किए बिना और फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दिए बिना समझौता होता है तो वह स्वीकार नहीं होगा।
  • Turkey के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan ने भी Israel पर कड़ा रुख अपनाया। Gaza में मानवीय सहायता रोकने और तुर्की नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद Erdogan ने Netanyahu को शांति का सबसे बड़ा दुश्मन बताया।
  • Iran, Yemen और Lebanon के संगठन पहले ही इस समझौते के खिलाफ थे।

इसका सीधा असर Hamas पर पड़ा। संगठन का एक धड़ा समझौते की ओर झुक रहा था, जबकि दूसरा इसे खारिज करने के पक्ष में था।

Hamas के नए कमांडर की भूमिका

गाजा युद्ध (Gaza War) की रणनीति तय करने में अब सबसे अहम किरदार Hamas के नए सैन्य प्रमुख Izz al-Din Haddad का है। Yahya Sinwar की मौत के बाद Haddad को Hamas का अंतिम कमांडर माना जा रहा है।

Haddad, जिन्हें संगठन के अंदर Abu Suhaib के नाम से जाना जाता है, 1987 से Hamas के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर Hamas को खत्म होना है तो वह लड़ते हुए खत्म होगा। BBC Arabic की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Haddad Trump के शांति प्रस्ताव से बेहद नाराज हैं।

Putin की एंट्री से बदलता समीकरण

गाजा युद्ध (Gaza War) में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब Vladimir Putin ने खुलकर Hamas का समर्थन कर दिया। Putin ने कहा कि फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिलना चाहिए और Gaza पर फिलिस्तीनी प्राधिकरण का नियंत्रण होना चाहिए।

Putin ने यहां तक कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों पर मुस्लिम देशों को भरोसा नहीं करना चाहिए। रूस को उन्होंने “असल सुपर पावर” बताया। यूक्रेन युद्ध में अमेरिका और NATO से मिली चुनौतियों का बदला लेने का संदेश भी Putin ने इस मौके पर दिया।

इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई। अब तस्वीर यह है कि एक ओर Trump और Netanyahu हैं, और दूसरी ओर Putin और वे देश खड़े हैं जो Israel के हमलों से नाराज हैं।

आगे क्या हो सकता है?

गाजा युद्ध (Gaza War) के भविष्य को लेकर अब सवाल और भी गंभीर हो गए हैं। Israel ने जिस तरह का अल्टीमेटम Hamas को दिया है, उससे लगता है कि अगले कुछ दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं। Netanyahu पहले ही साफ कर चुके हैं कि Israel सिर्फ तब रुकेगा जब Hamas को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

वहीं Hamas यह मानता है कि Trump का शांति समझौता उसके अस्तित्व को खतरे में डाल देगा। इसीलिए संगठन किसी भी कीमत पर इसे मानने को तैयार नहीं है। अब Putin के समर्थन के बाद Hamas को नई ताकत मिलती दिख रही है।

गाजा युद्ध (Gaza War) अब सिर्फ Israel और Hamas तक सीमित नहीं है। इसमें अमेरिका, रूस, तुर्की, क़तर, पाकिस्तान, ईरान जैसे देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो चुके हैं। Putin के समर्थन ने Hamas को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी है और Trump के Peace Plan को कमजोर कर दिया है।

क्या Putin वाकई फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र दिला पाएंगे? क्या Netanyahu Israel की सैन्य शक्ति से Hamas को पूरी तरह खत्म कर देंगे? और क्या Trump का 20 सूत्री शांति समझौता इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जाएगा?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तय करेंगे कि गाजा युद्ध (Gaza War) मध्य पूर्व और दुनिया की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा।

Leave a Comment