पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। दरअसल, दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा से हुए गैंगरेप मामले के बीच Bengal CM Mamata Banerjee ने रविवार (11 अक्टूबर 2025) को कहा कि खासकर हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों को रात में बाहर नहीं निकलना चाहिए और उन्हें खुद अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक Mamata Banerjee की आलोचना शुरू हो गई। विपक्ष ने इसे “विक्टिम ब्लेमिंग” बताया, तो कई लोग यह सवाल पूछने लगे कि आखिर महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ उन्हीं पर क्यों डाली जा रही है?
क्या कहा Mamata Banerjee ने?
दुर्गापुर में एक निजी मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना के बाद मीडिया से बात करते हुए Bengal CM Mamata Banerjee ने कहा,
“खासकर लड़कियों को रात के समय बाहर नहीं आना चाहिए। उन्हें खुद भी अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि राज्य की पुलिस हर घर पर निगरानी नहीं रख सकती, इसलिए निजी कॉलेजों और हॉस्टलों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
“अगर कोई रात 12:30 बजे बाहर जाता है, तो यह उनका अधिकार है, लेकिन जो छात्र हॉस्टल में रहते हैं, उनके लिए कुछ नियम होने चाहिए,” Mamata Banerjee ने कहा।
दुर्गापुर केस: क्या हुआ था?
यह मामला पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर का है। ओडिशा की रहने वाली एक मेडिकल छात्रा शुक्रवार रात (10 अक्टूबर 2025) अपने एक पुरुष दोस्त के साथ कॉलेज से बाहर गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसी रात कॉलेज कैंपस के पास कुछ अज्ञात लोगों ने छात्रा के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया।
पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और बाकी आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी जारी है। बताया जा रहा है कि सभी आरोपी स्थानीय हैं और उन्हें घटना के पास के जंगलों से पकड़ा गया।
Mamata Banerjee के बयान पर विपक्ष का हमला
Bengal CM Mamata Banerjee के बयान पर बीजेपी ने जमकर निशाना साधा। बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल सड़कों पर उतरीं, जबकि राज्य अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह बयान साबित करता है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार महिलाओं की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से गैर-जिम्मेदार है।
भट्टाचार्य ने कहा,
“दुर्गापुर में हुए सामूहिक बलात्कार के बाद मुख्यमंत्री Mamata Banerjee का कहना कि महिलाएं शाम के बाद घर से न निकलें — बेहद असंवेदनशील और अपमानजनक है। प्रशासनिक नाकामी को छिपाने के लिए अब सरकार महिलाओं को ही दोषी ठहरा रही है। यह साफ तौर पर विक्टिम ब्लेमिंग का मामला है।”
वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मजही ने भी Mamata Banerjee से अपील की है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ जल्द और कड़ी कार्रवाई की जाए।
‘सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?’
Mamata Banerjee के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या महिलाओं की सुरक्षा का मतलब यह है कि वे रात में घर से बाहर ही न निकलें?
कई महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह सोच न सिर्फ पुरानी है, बल्कि इससे अपराधियों को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिलता है।
कई लोगों ने यह भी कहा कि जब एक छात्रा मेडिकल की पढ़ाई करने किसी दूसरे राज्य से आती है, तो उसे यह भरोसा होना चाहिए कि वह जहां पढ़ रही है, वहां राज्य सरकार उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी — न कि उसे यह कहा जाएगा कि “रात में बाहर मत जाओ।”
Mamata Banerjee ने दी सफाई
इस पूरे विवाद के बाद Bengal CM Mamata Banerjee के करीबी सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री का मकसद किसी को दोष देना नहीं था। उनका इरादा सिर्फ इतना था कि छात्राओं को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि पुलिस हर वक्त हर जगह मौजूद नहीं रह सकती।
हालांकि विपक्ष और कई संगठनों का कहना है कि मुख्यमंत्री को इस समय महिलाओं को भरोसा देने की जरूरत थी, न कि उन्हें सावधानी के नाम पर सीमित करने की।
यह विवाद नया नहीं
यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में इस तरह की बहस उठी हो। अगस्त 2024 में कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की एक महिला डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या के बाद भी सरकार ने एक सलाह जारी की थी। उसमें कहा गया था कि महिलाओं की नाइट ड्यूटी को कम किया जाए।
हालांकि, जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठा, तो राज्य सरकार को वह सलाह वापस लेनी पड़ी। अब एक बार फिर Mamata Banerjee के बयान ने वही पुराना विवाद दोहरा दिया है — क्या सुरक्षा का हल महिलाओं की आवाजाही पर रोक लगाना है?
जनता का नजरिया
कोलकाता, दुर्गापुर और आसनसोल जैसे शहरों में कई छात्राओं ने मीडिया से कहा कि वे इस बयान से निराश हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करे, तो किसी लड़की को रात में बाहर जाने से डरने की जरूरत नहीं होगी।
कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि Mamata Banerjee को एक महिला मुख्यमंत्री होने के नाते इस मुद्दे पर और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। क्योंकि जब नेता ही महिलाओं की आज़ादी पर सवाल उठाने लगते हैं, तो समाज में गलत संदेश जाता है।
दुर्गापुर की यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि महिलाओं की सुरक्षा केवल बयानबाज़ी का मुद्दा नहीं हो सकती। पुलिस व्यवस्था, हॉस्टल मैनेजमेंट और प्रशासन — सभी को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
हालांकि Bengal CM Mamata Banerjee ने कहा कि राज्य में ऐसे अपराधों के लिए “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या महिलाओं को अपनी सुरक्षा खुद करने की सलाह देना पर्याप्त है?
जब तक कानून का डर अपराधियों में नहीं होगा और समाज यह नहीं समझेगा कि अपराधी ही दोषी हैं, तब तक महिलाओं से “रात में बाहर मत जाओ” जैसी बातें सिर्फ बहस ही बढ़ाएंगी।