अमेरिका में भारतीय मूल के विदेश नीति विशेषज्ञ Ashley Tellis को इस सप्ताह गिरफ्तार किया गया। Ashley Tellis, जो लंबे समय से US और South Asia के मामलों में सलाहकार रहे हैं और भारत-अमेरिका के नागरिक परमाणु समझौते में भी अहम भूमिका निभाई थी, पर आरोप है कि उन्होंने संवेदनशील सरकारी दस्तावेज़ों को गैरकानूनी रूप से अपने घर पर रखा।
अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने मंगलवार, 14 अक्टूबर को घोषणा की कि Ashley Tellis पर unlawful retention of national defense information का आरोप लगाया गया है। उनके वर्जीनिया स्थित घर के बेसमेंट में 1,000 से अधिक पेज “TOP SECRET” और “SECRET” दस्तावेज़ पाए गए।
सुरक्षा और आरोप
अमेरिका के Eastern District of Virginia की US अटॉर्नी Lindsey Halligan ने कहा:
“इस मामले में लगाए गए आरोप हमारे नागरिकों की सुरक्षा और देश की रक्षा के लिए गंभीर खतरा पेश करते हैं।”
यदि दोष साबित होता है तो Ashley Tellis को 10 साल तक जेल और $2,50,000 तक जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
कैसे हुआ दस्तावेज़ों का एक्सट्रैक्शन
FBI की फाइलों के मुताबिक, surveillance वीडियो में Ashley Tellis को कई federal buildings जैसे State Department और Department of Defense से briefcase में दस्तावेज़ ले जाते हुए देखा गया। कहा जा रहा है कि उन्होंने इन स्थानों पर अपनी security clearance का फायदा उठाकर confidential दस्तावेज़ print किए और अपने घर ले गए।
विशेष रूप से, 25 सितंबर 2025 को surveillance कैमरे में उन्हें State Department में घंटों देखी गई। उन्होंने 1,288 पेज की Air Force मैनुअल को access किया, नाम बदलकर “Econ Reform” किया और कई पेज print किए। कुछ मिनटों बाद उन्होंने rename किया गया फाइल delete कर दिया।
इसके दो हफ्ते बाद, 10 अक्टूबर को उन्हें Pentagon facility में देखा गया। वहां उन्होंने top secret दस्तावेज़ों को notepad के पन्नों में छुपाकर briefcase में रखा। इसके कुछ घंटे बाद वे सीधे अपने वर्जीनिया घर चले गए।
चीन के अधिकारियों के साथ मुलाकातें
FBI की जांच में सामने आया कि Ashley Tellis ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार Chinese government officials से मुलाकात की। 15 सितंबर 2022 को एक बैठक में उन्हें “manila envelope” ले जाते देखा गया, जबकि चीनी अधिकारी “gift bag” लेकर आए। बैठक के अंत में यह envelope उनके पास नहीं था।
अन्य बैठकें में FBI ने सुना कि उन्होंने Iran-China relations, emerging technologies और US-Pakistan relations पर चर्चा की। हाल ही में, सितंबर 2025 में एक बैठक में उन्हें चीनी अधिकारियों से “red gift bag” मिलता भी देखा गया। हालांकि, affidavit में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि Ashley Tellis ने classified documents चीनी अधिकारियों को दिए।
घर की तलाशी और दस्तावेज़ों का भंडार
पिछले सप्ताह FBI ने Ashley Tellis के घर की तलाशी ली। तलाशी में उनके घर के अलग-अलग हिस्सों से 1,000 से अधिक पेज top secret और secret दस्तावेज़ बरामद हुए। ये दस्तावेज़ locked cabinets, basement के desk और black trash bags में रखे हुए थे।
इन सभी सबूतों के आधार पर FBI ने Ashley Tellis पर “unlawful retention of national defense information” का आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार किया।
पूर्व प्रतिष्ठित करियर और अब सवालों के घेरे में
Ashley Tellis, 64 साल के, लंबे समय तक अमेरिकी सरकार के उच्चतम स्तर पर काम कर चुके हैं। वे US State Department में unpaid adviser और Pentagon के Office of Net Assessment में contractor रहे। उन्हें South Asia मामलों के विशेषज्ञ के रूप में माना जाता था और उन्हें India-US civil nuclear agreement में अहम भूमिका निभाने वाला रणनीतिकार कहा जाता था।
लेकिन हाल के वर्षों में उनका दृष्टिकोण सख्त हो गया। वे भारत के प्रति हॉकिश रवैया रखने लगे और New Delhi को अक्सर unreliable partner मानने लगे। इस आरोप के बाद विशेषज्ञ यह भी सोच रहे हैं कि क्या Ashley Tellis ने Mahabharat Karna जैसी रणनीतिक भूमिका निभाने के दौरान भारत के प्रति अमेरिकी नीतियों में हानि पहुँचाने की कोशिश की।
क्या हो सकता है आगे?
फिलहाल Ashley Tellis पर केवल unlawful retention of national defense information का मामला है। यदि दोष साबित होता है तो उन्हें 10 साल तक जेल और $2,50,000 जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। अमेरिकी प्रशासन और विदेश नीति समुदाय इस मामले की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि Ashley Tellis के मामले ने वॉशिंगटन में South Asia affairs में काम करने वाले think tanks और नीति निर्माताओं में हलचल मचा दी है। यह घटना यह दिखाती है कि उच्च स्तर के रणनीतिक सलाहकार भी कभी-कभी संवेदनशील सुरक्षा नियमों के उल्लंघन में फंस सकते हैं।
Ashley Tellis का मामला केवल व्यक्तिगत आरोप नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की सुरक्षा नीतियों और विदेश नीति विशेषज्ञों की निगरानी पर भी सवाल उठाता है। भारतीय मूल के इस रणनीतिकार की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों में चर्चा का नया दौर शुरू कर दिया है।