भारत का राष्ट्रीय गीत ‘Vande Mataram’ आज अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गीत को सलाम करते हुए कहा कि ‘Vande Mataram’ वह गीत है जिसने आज़ादी की लड़ाई में हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की ज्योति जलाई। पीएम मोदी ने इसे “मां भारती की ममता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक” बताया।
प्रधानमंत्री ने बुधवार देर रात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कल, 7 नवंबर, हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है। हम ‘Vande Mataram’ के 150 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। यह गीत पीढ़ियों से हमारे भीतर देशभक्ति की अदम्य भावना जगाता रहा है।”
उन्होंने बताया कि इस खास मौके पर वे दिल्ली में सुबह 9:30 बजे आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे, जहां ‘Vande Mataram’ की 150वीं वर्षगांठ को मनाने के लिए एक विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एक सामूहिक गायन होगा, जिसमें सैकड़ों लोग एक साथ ‘Vande Mataram’ का गायन करेंगे।
‘Vande Mataram’ के 150 साल: एक ऐतिहासिक सफर
‘Vande Mataram’ का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था और सबसे पहले बंगाली साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था। “मां, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं” — इस गीत के ये शब्द भारतीयों के लिए सिर्फ एक पंक्ति नहीं, बल्कि भावना बन गए।
बाद में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘Vande Mataram’ को अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया, जो 1882 में प्रकाशित हुआ। गीत को संगीतबद्ध किया था रवींद्रनाथ टैगोर ने, जिन्होंने इसे 1896 में कोलकाता में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार गाया था।
जब ब्रिटिश सरकार घबरा गई थी ‘Vande Mataram’ से
1905 में पहली बार ‘Vande Mataram’ को एक राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल किया गया। यह नारा बंगाल विभाजन के विरोध का प्रतीक बन गया। इस गीत की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि ब्रिटिश हुकूमत इससे डरने लगी।
नवंबर 1905 में रांगपुर, बंगाल के एक स्कूल के 200 छात्रों पर ‘Vande Mataram’ गाने के लिए ₹5 का जुर्माना लगाया गया। कई जगहों पर इस नारे को प्रतिबंधित करने के आदेश दिए गए। लेकिन प्रतिबंधों के बावजूद, ‘Vande Mataram’ का जोश जनता में और भी बढ़ता गया।
‘Vande Mataram’ का प्रसार और स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
1905 के अक्टूबर महीने में उत्तर कोलकाता में ‘बंदे मातरम् संप्रदाय’ नाम का एक संगठन बना, जिसका उद्देश्य मातृभूमि की सेवा को एक धार्मिक कर्तव्य के रूप में स्थापित करना था। हर रविवार संगठन के सदस्य ‘प्रभात फेरी’ निकालते और ‘Vande Mataram’ गाते हुए लोगों से देश के लिए योगदान की अपील करते। रवींद्रनाथ टैगोर भी कई बार इन प्रभात फेरियों में शामिल हुए।
1906 में बिपिन चंद्र पाल ने अंग्रेजी अखबार ‘Bande Mataram’ की शुरुआत की, जिसमें बाद में श्री अरविंदो भी शामिल हुए। यह अखबार भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया। इसके माध्यम से ‘Vande Mataram’ की भावना पूरे देश में फैल गई।
1907 में जब भिकाजी कामा ने बर्लिन में भारत का पहला झंडा फहराया, तो उस पर भी ‘Vande Mataram’ लिखा गया था। 1908 में जब लोकमान्य तिलक को गिरफ्तार किया गया, तब बेलगाम में लोगों ने ‘Vande Mataram’ के नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। यह गीत आज़ादी के संघर्ष का प्रतीक बन चुका था।
संविधान सभा में ‘Vande Mataram’ को मिला सम्मान
जब भारत आज़ाद हुआ और संविधान सभा में राष्ट्रीय प्रतीकों पर चर्चा हुई, तो ‘Vande Mataram’ को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ। 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सभा में घोषणा की कि रवींद्रनाथ टैगोर का ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान होगा, और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का ‘Vande Mataram’ राष्ट्रीय गीत के रूप में समान सम्मान पाएगा।
उन्होंने कहा, “‘Vande Mataram’ हमारे स्वतंत्रता आंदोलन में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इसलिए इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में वही सम्मान दिया जाएगा जो राष्ट्रीय गान को प्राप्त है।”
पीएम मोदी का संदेश: ‘Vande Mataram’ हमारे भीतर एकता की शक्ति जगाता है
अपने हालिया ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भी ‘Vande Mataram’ की चर्चा करते हुए कहा, “यह गीत हमारे दिलों में जो भाव जगाता है, वह किसी शब्द में बयान नहीं किया जा सकता। ‘Vande Mataram’ सुनते ही हमारे भीतर मां भारती के प्रति स्नेह और जिम्मेदारी की भावना जाग उठती है। जब भी कठिनाई आती है, यह नारा हमें एकता की शक्ति से भर देता है।”
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की थी कि वे ‘Vande Mataram’ की 150वीं वर्षगांठ को मनाने के लिए अपने विचार और सुझाव साझा करें। उन्होंने कहा कि यह अवसर न केवल इतिहास को याद करने का है, बल्कि उस भावना को फिर से महसूस करने का भी है जिसने भारत को एकजुट किया।
‘Vande Mataram’ आज सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है। यह गीत आज भी हर भारतीय के दिल में वही उत्साह, वही गर्व और वही देशभक्ति जगाता है जो 150 साल पहले जगाई थी। जब-जब यह गीत गूंजता है, तो हमें याद दिलाता है कि हमारा सबसे बड़ा धर्म है—मां भारती की सेवा।