Dhurandhar में रणवीर सिंह जिस हीरो को निभा रहे हैं, उसकी असली कहानी सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे—Major Mohit Sharma कौन थे?

फिल्म Dhurandhar के ट्रेलर ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। सोशल मीडिया पर हर कोई पूछ रहा है कि रणवीर सिंह जिस फौजी का किरदार निभा रहे हैं, क्या वह कोई असली सैनिक था? क्या सच में भारतीय सेना में ऐसा कोई शेर था? जवाब है—हाँ, और उसका नाम था Major Mohit Sharma। असलियत में वह फिल्म Dhurandhar में दिखाए किरदार से हजार गुना अधिक साहसी, शांत, खतरनाक और देशभक्त थे।

गाजियाबाद का साधारण लड़का, लेकिन दिल में था देश का शोर

1995 में 12वीं पास करने के बाद गाजियाबाद का एक साधारण लड़का इंजीनियर बनने की राह पर था, लेकिन उसके दिल में वर्दी पहनने का जुनून धड़क रहा था। वह था Major Mohit Sharma। घरवालों की नजर से बचकर उन्होंने चुपके से NDA का फॉर्म भरा, परीक्षा दी और पास भी हो गए। परिवार ने रिज़ल्ट छिपा लिया, लेकिन मोहित पीछे नहीं हटे। UPSC के दफ्तर में खुद फोन करके उन्होंने रिज़ल्ट पूछा और पता चला कि वे पास हैं। यही वो जिद थी जिसने उन्हें बाद में भारत का असली हीरो बनाया—एक ऐसा हीरो जिसे आगे चलकर Dhurandhar के नाम से भी लोग याद करेंगे।

NDA से Para Special Forces तक—यहीं से शुरू हुआ असली Dhurandhar

NDA में तीन साल की ट्रेनिंग, फिर IMA देहरादून में एक साल और दिसंबर 1999 में 5 मद्रास रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट बनकर सेना में शामिल हुए। लेकिन 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमले ने मोहित के भीतर की आग को और भड़का दिया। कश्मीर में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान उन्होंने पहली बार Para Special Forces के कमांडोज़ की बहादुरी को देखा और ठान लिया कि उन्हें भी उसी यूनिट का हिस्सा बनना है। पहली कोशिश में रिजेक्ट हुए, लेकिन दूसरी बार में पास हो गए और Para SF के असली “धुरंधर” बन गए।

इफ्तकार भट्ट—जब एक भारतीय सैनिक दुश्मन के बीच रहकर उनका भरोसा जीत आया

कश्मीर में हिजबुल के सबसे खतरनाक आतंकियों—अबू तुरारा और अबू सबजार—का नेटवर्क तोड़ना आसान नहीं था। फैसला हुआ कि सेना का कोई जवान अंडरकवर बनकर इनके बीच जाएगा। यह मिशन मौत से सीधा मुकाबला था। और इस मिशन के लिए आगे आए Major Mohit Sharma। उन्होंने बाल बढ़ाए, दाढ़ी बढ़ाई और नाम रखा—इफ्तकार भट्ट। कहानी गढ़ी कि सेना ने उनके भाइयों को मार दिया है और वह बदला लेने आया है। उन्होंने आतंकियों के सामने सेना की पोस्ट पर नकली हमला प्लान करके दिखाया, जिससे दोनों आतंकी उन पर पूरी तरह भरोसा करने लगे। दो हफ्तों तक वे उन्हीं के साथ रहे—उनके घर में सोए, उनके साथ कहवा पिया, हंसी-मजाक किया और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी। फिर आया वह दिन जब आतंकियों ने अचानक AK-47 उनकी ओर तान दी। “बताओ तुम कौन हो?” मोहित शांत रहे और बोले—“अगर शक है तो गोली मार दो।” आतंकियों ने बंदूक नीचे रख दी, और जैसे ही उन्होंने पीठ घुमाई, मोहित ने शॉल हटाया, पिस्तौल निकाली और दोनों को खत्म कर दिया। यही असली कहानी है, जिसके एक अंश को Dhurandhar फिल्म दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं ज्यादा खतरनाक थी।

प्यार, जिम्मेदारी और फिर एक बार कश्मीर का बुलावा

इस मिशन के बाद उन्हें Sena Medal मिला। इसी दौरान उन्हें जिंदगी का प्यार मिला—कैप्टन रेशमा सरीन। दोनों ने शादी की। पोस्टिंग बदली और वे Nahan में स्पेशल फोर्सेज ट्रेनिंग स्कूल में इंस्ट्रक्टर बन गए। लेकिन जो सैनिक मौत को चुनौती दे चुका हो, वह कब चैन से बैठता है? 2008 में कश्मीर का दोबारा बुलावा आया, और Major Mohit Sharma फिर से घाटी में लौट गए।

Kupwara ऑपरेशन—31 साल की उम्र में एक ऐसा बलिदान जिसने इतिहास बदल दिया

20 मार्च 2009 को कुपवाड़ा के Hafruda जंगल में आतंकियों की घुसपैठ की खबर मिली। Major Mohit Sharma 25 कमांडोज़ के साथ निकले। सुबह जंगल में घुसते ही गोलियों की बौछार शुरू हो गई। आतंकियों की पोजीशन ऊंचाई पर थी, इसलिए भारतीय टीम को लगातार फायर झेलना पड़ा। कमांडो नेत्र सिंह शहीद हुए। कई जवान घायल हुए। मोहित ने आगे बढ़कर फायरिंग रोकी, लेकिन गोली उनकी बांह में लगी। उन्होंने पट्टा बांधा और लड़ाई जारी रखी। फिर दूसरी गोली कमर में लगी—फिर भी पीछे नहीं हटे। उन्होंने खुद ग्रेनेड लॉन्चर उठाया और एक-एक करके चार आतंकियों को खत्म कर दिया। लेकिन जब वे कवर की तरफ बढ़ रहे थे, एक गोली उनकी जैकेट के कमजोर हिस्से को चीरकर निकल गई। खून बहता रहा, शरीर कमजोर पड़ता रहा, लेकिन उन्होंने अपने साथियों से कहा—“एक भी आतंकी बचकर नहीं जाना चाहिए।” उन्हें शाम 4 बजे अस्पताल पहुंचाया गया, पूरी रात ऑपरेशन चला, लेकिन अगली सुबह देश का यह शेर अमर हो गया। यह वह कहानी है जिसे Dhurandhar फिल्म कभी पूरी तरह नहीं दिखा सकती, क्योंकि वास्तविक वीरता किसी भी रील से बड़ी होती है।

Ashok Chakra और एक नाम जो हमेशा भारत के दिल में जिंदा रहेगा

Major Mohit Sharma को उनकी वीरता के लिए मरणोपरांत Ashok Chakra से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी मेजर रेशमा शर्मा ने आज तक दोबारा शादी नहीं की। गाजियाबाद में मेट्रो स्टेशन, सड़कें, स्टेडियम—सब उनके नाम पर हैं। लेकिन असली स्मारक है हर भारतीय का दिल, जहाँ आज भी उनका नाम गर्व से गूंजता है।
आज जब Dhurandhar की चर्चा हो रही है, लोग ट्रेलर देखकर पूछते हैं—क्या यह किरदार वास्तविक था? हाँ, और उससे भी कहीं बड़ा था वह इंसान जिसका नाम था—Major Mohit Sharma
भारत उन्हें हमेशा सलाम करता रहेगा। जय हिंद।

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