Hong Kong fire: हांगकांग की 7 ऊंची इमारतों में लगी आग: ‘पूरी सोसायटी जल उठी’, सैकड़ों लोग अब भी लापता

Hong Kong fire: हांगकांग के ताई पो इलाके में वांग फुक कोर्ट नाम के बड़े हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में लगी Hong Kong fire ने पूरे शहर को दहला दिया है। इस Hong Kong fire में अब तक कम से कम 44 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और करीब 279 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह Hong Kong fire कई दशक में शहर की सबसे घातक घटनाओं में से एक बन गई है, जहां सैकड़ों लोगों को रातों-रात अपने घर छोड़कर शेल्टर में जाना पड़ा।​

कब और कैसे शुरू हुई

फायर सर्विसेज विभाग को बुधवार दोपहर करीब 2:51 बजे पहली कॉल मिली, जब 31–32 मंजिला टावर की बाहरी साइड पर लगी बांस की मचान पर अचानक आग भड़क उठी। कुछ ही मिनटों में Hong Kong fire इतनी तेजी से फैली कि वांग फुक कोर्ट की आठ इमारतों में से सात टावर उसकी चपेट में आ गए और कई मंजिलों से धुआं और लपटें साफ दिखने लगीं। शुरू में इस Hong Kong fire को लेवल-4 अलार्म घोषित किया गया, बाद में इसे शहर की सबसे गंभीर श्रेणी, लेवल-5 अलार्म तक बढ़ाना पड़ा ताकि ज्यादा संसाधन तुरंत मौके पर भेजे जा सकें।​

इतनी तेजी से क्यों फैली

जांच कर रही एजेंसियों के मुताबिक, Hong Kong fire के तेजी से फैलने के पीछे दो बड़े कारण सामने आ रहे हैं। पहला, टावरों की बाहरी दीवारों पर लगी बांस की मचान और उस पर चढ़ा निर्माण कार्य का प्लास्टिक/कंस्ट्रक्शन नेट, जो आग पकड़ने के बाद दूर तक भड़क गया। दूसरा, कुछ जगहों पर स्टायरोफोम और दूसरी ज्वलनशील निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की बात सामने आ रही है, जिसकी वजह से Hong Kong fire ने देखते ही देखते एक से ज्यादा इमारतों को घेर लिया।​

कितनी बड़ी है मानवीय त्रासदी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक Hong Kong fire में मरने वालों की संख्या 44 तक पहुंच गई है, जिनमें एक फायरफाइटर भी शामिल है जिसने लोगों को बचाते हुए अपनी जान गंवाई। करीब 60 से ज्यादा लोग घायल हैं, जिनमें कई गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि Hong Kong fire के बाद लगभग 900 से ज्यादा लोगों को पास के कम्युनिटी सेंटर्स और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में अस्थायी शेल्टर में रखा गया है। हजारों फ्लैट वाले इस वांग फुक कोर्ट कॉम्प्लेक्स में करीब 4,800 लोग रहते हैं, इसलिए माना जा रहा है कि Hong Kong fire से प्रभावित परिवारों की वास्तविक संख्या इससे भी कहीं ज्यादा हो सकती है।​

बचाव अभियान और सरकारी कदम

Hong Kong fire की सूचना मिलते ही 700 से ज्यादा फायरफाइटर्स, 100 से अधिक फायर ट्रक और दर्जनों एम्बुलेंस पूरी रात मौके पर लगे रहे। कई इमारतों में ऊपरी मंजिलों तक पहुंचना बेहद मुश्किल रहा, क्योंकि Hong Kong fire से पैदा हुई तेज गर्मी और धुएं की वजह से सीढ़ियां और कॉरिडोर काफी देर तक इस्तेमाल के लायक नहीं थे। हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली ने Hong Kong fire को “बड़ा हादसा” बताते हुए पीड़ितों के लिए पूरी मदद और तेजी से राहत-बचाव का आश्वासन दिया है।​

जांच और गिरफ्तारी

पुलिस ने Hong Kong fire के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आपराधिक लापरवाही और लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार होने के आरोप लगाए गए हैं। शुरुआती जांच में शक है कि मेंटेनेंस और रेनोवेशन के दौरान सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ, जिसकी वजह से Hong Kong fire ने इतनी बड़ी तबाही मचा दी। अब अधिकारियों ने वांग फुक कोर्ट सहित ऐसे सभी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स की समीक्षा शुरू कर दी है, जहां इसी तरह की बांस की मचान और ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, ताकि Hong Kong fire जैसी घटना दोबारा न हो।​

Hong Kong fire बाकी दुनिया के लिए सबक

विशेषज्ञों का मानना है कि Hong Kong fire सिर्फ एक शहर की त्रासदी नहीं, बल्कि दुनिया भर के घनी आबादी वाले शहरों के लिए चेतावनी है। ऊंची इमारतों में रेनोवेशन के दौरान इस्तेमाल होने वाली सामग्री, फायर एग्जिट का सही काम करना, नियमित फायर ड्रिल और रेस्क्यू प्लान जैसी चीजें अगर समय पर जांच न हों तो Hong Kong fire जैसी घटनाएं कहीं भी हो सकती हैं। भारत सहित कई देशों में भी ऊंची रिहायशी इमारतों का तेज़ी से विकास हो रहा है, ऐसे में Hong Kong fire से जुड़े सबक समय रहते अपनाना ही लोगों की जान बचाने का सबसे जरूरी कदम माना जा रहा है।

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