Ajit Agarkar विवाद फिर गर्माया: BCCI अधिकारी के अजीब ‘स्पोर्ट्स ऐप’ बहाने के बाद सेलेक्टर की अचानक घरेलू मैच में मौजूदगी चर्चा में

भारतीय क्रिकेट में इन दिनों Ajit Agarkar को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी में 2-0 की टेस्ट सीरीज़ हार के बाद से ही आलोचना तेज है और अब एक BCCI अधिकारी के अजीबोगरीब बयान ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है। इस बीच शुक्रवार को Ajit Agarkar को झारखंड और कर्नाटक के बीच खेले गए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी मैच में देखा गया, जिससे चर्चा और तेज हो गई कि क्या दबाव बढ़ने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट पर ध्यान देना शुरू किया है।

घरेलू मैच से दूर रहने पर बढ़ते सवाल

काफी समय से यह मुद्दा उठता रहा है कि Ajit Agarkar घरेलू क्रिकेट में कम दिखाई देते हैं। रणजी ट्रॉफी में उनका दिखना दुर्लभ रहा है। आखिरी बार उन्हें 2024 में चेन्नई में तमिलनाडु बनाम कर्नाटक मैच में देखा गया था। इसके बाद वे अधिकतर समय टीम इंडिया के साथ विदेशी दौरों पर रहे—ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दोनों यात्राओं पर उनकी मौजूदगी रही।

दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज़ में भारत की हार के बाद आलोचकों ने इस बात को गंभीर रूप से उठाया कि टेस्ट स्पेशलिस्ट जैसे सरफराज खान, अभिमन्यु ईश्वरन और करुण नायर को नजरअंदाज़ कर दिया गया, जबकि साई सुदर्शन और नितीश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ियों को, जिनके रणजी आंकड़े सामान्य हैं, काफी तेज़ी से टीम में जगह दी गई। इस चयन नीति पर सबसे ज़्यादा निशाना Ajit Agarkar पर ही साधा गया।

BCCI अधिकारी ने दिया अजीब ‘स्पोर्ट्स ऐप’ तर्क

जब विवाद बढ़ता गया, तो एक BCCI अधिकारी ने Ajit Agarkar के घरेलू मैचों में न दिखने का बचाव करते हुए ऐसा बयान दिया, जिसने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने कहा कि “हर स्कोर ऐप पर आता है”, इसीलिए मैदान में मौजूद रहने की आवश्यकता नहीं है।

इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई पूर्व क्रिकेटर्स और फैंस ने कहा कि केवल स्कोर देखने से किसी खिलाड़ी की तकनीक, मानसिकता या मैच की स्थिति को समझ पाना संभव नहीं है। घरेलू क्रिकेट में सेलेक्टर की मौजूदगी खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसीलिए जब अधिकारी के इस बहाने को सामने लाया गया तो आलोचना और गहरी हो गई।

आलोचना के बीच घरेलू मैच में पहुंचे Ajit Agarkar

इसी बीच शुक्रवार को Ajit Agarkar को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के मुकाबले में स्टैंड में बैठकर खेल का निरीक्षण करते देखा गया। यह पहली बार था जब पिछले कई महीनों के बाद वे किसी बड़े घरेलू मैच में मौजूद दिखे। मैच झारखंड और कर्नाटक के बीच खेला गया और मैदान पर उनकी मौजूदगी ने तुरंत सुर्खियां बटोरीं।

क्रिकेट समुदाय में सवाल उठे कि क्या यह महज़ संयोग था या फिर लगातार आलोचनाओं और BCCI के आने वाले मीटिंग के चलते Ajit Agarkar ने यह कदम उठाया? क्योंकि इसी हफ़्ते BCCI ने स्पष्ट किया था कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ हार के बाद selectors के साथ एक महत्वपूर्ण चर्चा होने वाली है।

सेलेक्शन पर बढ़ती पारदर्शिता की मांग

यह पूरा विवाद भारतीय क्रिकेट में सेलेक्शन प्रक्रियाओं पर उठ रही चिंताओं को एक बार फिर सामने ले आया है। आलोचक लगातार कहते रहे हैं कि टीम संयोजन तैयार करते समय घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कई बार खिलाड़ियों ने भी यह महसूस किया है कि मैदान पर चयनकर्ता की मौजूदगी से उन्हें प्रेरणा मिलती है।

रणनीति, फॉर्म और फिटनेस के आधार पर टीम चुने जाने की ज़रूरत आज भी उतनी ही है जितनी पहले थी। लेकिन जब देश का मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट से दूर रहता है, तो सवाल स्वाभाविक हैं। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि भारत में क्रिकेट का सबसे मजबूत आधार ही घरेलू संरचना है और उसे नजरअंदाज़ करना चयन प्रक्रिया को कमजोर करता है।

BCCI और selectors की बैठक पर नजर

BCCI अधिकारी ने यह भी पुष्टि की है कि टेस्ट सीरीज़ हार के बाद बोर्ड selectors से बात करेगा। स्वाभाविक रूप से इसमें Ajit Agarkar से सवाल पूछे जाएंगे—खासकर चयन फैसलों, टीम में नए चेहरों की एंट्री और अनुभवी घरेलू खिलाड़ियों की उपेक्षा को लेकर।

फैंस और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारतीय टेस्ट टीम को मजबूत बनाना है तो घरेलू क्रिकेट को गंभीरता से लेना ही होगा। इसके लिए ज़रूरी है कि Ajit Agarkar जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग मैदान में जाकर मैच देखें, खिलाड़ियों से बात करें और उनकी तकनीक व मानसिकता को करीब से समझें।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें BCCI और selectors की होने वाली बैठक पर टिकी हैं। इस बीच यह भी देखा जाएगा कि क्या Ajit Agarkar अब घरेलू क्रिकेट में नियमित रूप से दिखाई देते हैं या यह उनकी एक बार की प्रतिक्रियात्मक मौजूदगी थी।

फिलहाल इतना साफ है कि यह विवाद तभी शांत होगा जब बोर्ड और सेलेक्टर्स यह सुनिश्चित करें कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निरंतरता बनी रहे। और इस पूरी चर्चा के केंद्र में Ajit Agarkar ही रहेंगे, जिन्हें आने वाले समय में अपने फैसलों और मैदान पर अपनी मौजूदगी दोनों से आलोचनाओं का जवाब देना होगा।

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