देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या और Dog Bite Death के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाया। स्ट्रे डॉग्स केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि अगर राज्यों ने जरूरी इंतजाम नहीं किए, तो “हर डॉग बाइट, हर मौत” के लिए भारी मुआवजा तय किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जो लोग सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें भी हमलों की जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जाएगा, खासकर जब हमला किसी पर “जीवनभर असर” छोड़ दे। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “हर Dog Bite Death, हर बाइट पर हम राज्य सरकारों पर भारी मुआवजा तय करने की संभावना देखते हैं, क्योंकि उन्होंने जरूरी इंतजाम नहीं किए। और डॉग फीडर्स की भी जिम्मेदारी होगी। आप उन्हें अपने घर ले जाइए, रखिए। उन्हें क्यों खुला छोड़ा जाए कि वे घूमते रहें, काटते रहें, पीछा करें? Dog Bite Death या डॉग बाइट का असर जीवनभर रहता है।”
कोर्ट की नाराजगी: “ABC Rules लागू करने में राज्य पूरी तरह फेल”
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को फटकार लगाई और कहा कि Animal Birth Control यानी ABC Rules लागू करने में वे “बुरी तरह नाकाम” रहे हैं। कोर्ट का साफ संदेश था कि समस्या सालों से चल रही है, लेकिन केंद्र और राज्य दोनों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसी वजह से हालात और बिगड़े हैं। बेंच ने कहा कि यह मुद्दा बहुत पुराना है और दशकों से इस पर चर्चा होती रही है, फिर भी जमीन पर हालात नहीं सुधरे। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जब समस्या बढ़ती गई, तब भी स्थानीय निकाय, नगर निगम और राज्य स्तर की व्यवस्था अक्सर ढीली रही। इसी ढिलाई का नतीजा है कि आज Dog Bite Death और बाइट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कोर्ट की टिप्पणी का साफ मतलब यह है कि अब “लापरवाही” को सामान्य प्रशासनिक चूक मानकर नहीं छोड़ा जाएगा।
“हर आदमी, महिला और बच्चे की मौत पर जिम्मेदारी तय होगी”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र सरकार और राज्य सरकारों दोनों को जवाबदेह ठहराएगा। बेंच ने टिप्पणी की कि यह समस्या अचानक नहीं बनी। लंबे समय से इसे नजरअंदाज किया गया, इसलिए यह कई गुना बढ़ गई। कोर्ट ने यहां तक कहा कि Dog Bite Death के हर मामले में जिम्मेदार सरकार पर भारी मुआवजा लगाया जा सकता है। यह बात आम लोगों के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि Dog Bite Death के अलावा, गंभीर डॉग बाइट से कई बार स्थायी नुकसान हो जाता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण और डर का असर लंबे समय तक रहता है। कोर्ट ने यही बात “lifelong effect” कहकर रेखांकित की।
डॉग फीडर्स पर सवाल: “खाना खिलाते हैं तो जिम्मेदारी भी लें”
सुनवाई का एक बड़ा हिस्सा डॉग फीडिंग को लेकर भी रहा। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या समूह कुत्तों को खाना खिलाता है, तो सिर्फ यही नहीं कि वह मदद कर रहा है, बल्कि उससे जुड़ी जिम्मेदारी भी बनती है। कोर्ट ने कहा कि अगर आप उन्हें पालना चाहते हैं, तो उन्हें अपने घर ले जाएं, सड़कों पर खुला छोड़कर नहीं। कोर्ट की नजर में सड़कों पर घूमते कुत्ते अगर काटते हैं या पीछा करते हैं और किसी की जिंदगी पर असर पड़ता है, तो उसमें फीडर्स की भूमिका भी देखी जाएगी। यह टिप्पणी इसलिए चर्चा में है क्योंकि कई इलाकों में लोगों के बीच तनाव इसी मुद्दे पर होता है। एक पक्ष कहता है कि कुत्तों को खाना देना दया है, दूसरा पक्ष कहता है कि इससे इलाके में झुंड बढ़ते हैं और खतरा बढ़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल किसी “बैन” जैसी बात नहीं कही, लेकिन Dog Bite Death और गंभीर हमलों के मामलों में जिम्मेदारी तय करने का संकेत जरूर दिया।
सवाल सीधा है: व्यवस्था क्यों नहीं बनी?
कोर्ट ने राज्यों से यही पूछा कि आखिर अब तक आवारा कुत्तों की गिनती, नसबंदी, टीकाकरण और निगरानी की ठोस व्यवस्था क्यों नहीं बनी। ABC Rules का उद्देश्य यही है कि कुत्तों की आबादी को नियंत्रित किया जाए, उन्हें वैक्सीनेट किया जाए और जोखिम कम किया जाए। लेकिन कोर्ट का कहना है कि नियम होने के बावजूद, अमल कमजोर रहा। यही कारण है कि Dog Bite Death जैसे मामले सामने आते हैं और फिर हर बार बहस शुरू होती है। कोर्ट का सख्त रुख इस तरफ इशारा करता है कि अब सिर्फ बयान और कागजी रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा। जमीन पर कार्रवाई दिखानी होगी।
आम लोगों के लिए क्या मतलब निकलता है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा संदेश यह है कि सुप्रीम कोर्ट अब इसे पब्लिक सेफ्टी का मुद्दा मान रहा है। यानी सड़क पर सुरक्षित चलना, बच्चों का पार्क में खेलना, बुजुर्गों का सुबह टहलना, इन सबको “रूटीन” समझकर छोड़ नहीं दिया जा सकता। अगर Dog Bite Death या गंभीर डॉग बाइट होती है, तो कोर्ट राज्यों से पूछेगा कि रोकथाम के लिए क्या किया गया। दूसरी बात, जो लोग नियमित रूप से कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें भी अब सतर्क रहना होगा। कोर्ट की टिप्पणी का संकेत है कि अगर फीडिंग के बाद कुत्ते हमला करते हैं और किसी की जिंदगी पर गहरा असर पड़ता है, तो जवाबदेही तय हो सकती है।
Dog Bite Death रोकने के लिए क्या किया जा सकता है?
कोर्ट ने सीधे तौर पर नीति नहीं लिखी, लेकिन ABC Rules के अमल पर जोर साफ है। इसमें आमतौर पर ये कदम आते हैं:
- आवारा कुत्तों की पहचान और रिकॉर्ड
- नसबंदी और टीकाकरण
- स्थानीय निकायों की सक्रिय टीम
- शिकायतों पर तुरंत एक्शन
- संवेदनशील इलाकों में निगरानी
लोगों को जागरूक करना कि डॉग बाइट होने पर देरी न करें Dog Bite Death के मामलों में अक्सर समय पर इलाज, एंटी-रेबीज वैक्सीन और सही मेडिकल केयर बहुत अहम होती है। इसलिए जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है जितनी प्रशासनिक कार्रवाई।
आगे क्या?
अब नजर अगली सुनवाई पर होगी, जहां राज्यों से जवाब और रिपोर्ट मांगी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह “हर Dog Bite Death पर भारी मुआवजा” की बात कही है, उससे साफ है कि कोर्ट इस मसले को हल्के में नहीं ले रहा। यह चेतावनी सिर्फ कागज पर नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि असली मुद्दा वही है: Dog Bite Death और गंभीर हमलों को रोकना। अंत में, यह बहस सिर्फ कुत्तों के पक्ष या विरोध की नहीं है। सवाल सार्वजनिक सुरक्षा का है। सुप्रीम कोर्ट का संकेत यही है कि इंसानी जान पहले है, और व्यवस्था की लापरवाही अब “सामान्य” नहीं मानी जाएगी। Dog Bite Death के हर मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में कोर्ट ने बड़ा संदेश दे दिया है।