Nipah virus airport screening शुरू: भारत में मामलों के बाद एशिया के एयरपोर्ट्स पर लौटी कोविड-जैसी सख्ती

Nipah virus airport screening: भारत में निपाह वायरस के नए मामलों ने एक बार फिर पूरे एशिया को सतर्क कर दिया है। पश्चिम बंगाल में संक्रमण की पुष्टि होते ही कई देशों ने अपने एयरपोर्ट्स पर Nipah virus airport screening दोबारा लागू कर दी है। थाईलैंड, नेपाल और ताइवान जैसे देशों में भारत से आने वाले यात्रियों की कड़ी स्वास्थ्य जांच शुरू हो चुकी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कोविड-19 के दौर की यादें ताजा हो गई हैं, जब एयरपोर्ट्स पर थर्मल स्कैनिंग, हेल्थ डिक्लेरेशन और अलग जांच आम बात थी।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि Nipah virus airport screening का मकसद घबराहट फैलाना नहीं, बल्कि संभावित खतरे को शुरुआती स्तर पर ही पहचानना और नियंत्रित करना है। निपाह वायरस की गंभीरता को देखते हुए एहतियात बरतना ज़रूरी माना जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के नए मामले

पश्चिम बंगाल के कोलकाता से सटे इलाकों में निपाह वायरस के कम से कम पांच मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें से कई संक्रमित स्वास्थ्यकर्मी बताए जा रहे हैं। यह क्लस्टर मुख्य रूप से कोलकाता से लगभग 25 किलोमीटर दूर बारासात के एक निजी अस्पताल से जुड़ा है।
जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले दो नर्सें तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के साथ बीमार पड़ी थीं। जांच में निपाह वायरस की पुष्टि होने के बाद पूरे अस्पताल और आसपास के क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक संदिग्ध मरीज, जिसे संभावित “इंडेक्स केस” माना जा रहा है, की बाद में मौत हो गई। हालांकि उसकी रिपोर्ट पूरी तरह कन्फर्म होने से पहले ही निधन हो गया, लेकिन उसी के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उन्हें निगरानी में रखा गया है।
इस स्थिति के बाद Nipah virus airport screening को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई।

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कितनी खतरनाक है निपाह वायरस संक्रमण

निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। आमतौर पर इसे फल खाने वाले चमगादड़ों से जोड़ा जाता है, जबकि कुछ मामलों में सूअर या दूषित भोजन भी संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, गले में खराश और खांसी शामिल हैं। गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन, भ्रम, दौरे और सांस लेने में गंभीर परेशानी हो सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक निपाह वायरस की मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है। फिलहाल इसके लिए कोई मान्य वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इलाज मुख्य रूप से सपोर्टिव केयर पर आधारित होता है, जिसमें ICU सपोर्ट और जटिलताओं को संभालना शामिल है।
इसी गंभीरता के चलते कई देश Nipah virus airport screening को जरूरी कदम मान रहे हैं।

भारत में सरकारी तैयारी और नियंत्रण उपाय

पश्चिम बंगाल में मामलों की पुष्टि होते ही राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया। बारासात और कोलकाता के आसपास के अस्पतालों में अलग आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं।
संक्रमित मरीजों को कोलकाता के बेलिघाटा स्थित संक्रामक रोग अस्पताल जैसे विशेष केंद्रों में भर्ती कराया गया है।

करीब 100 से अधिक लोगों को, जो संक्रमितों के संपर्क में आए थे, क्वारंटीन में रखा गया है। इन सभी की रोजाना स्वास्थ्य निगरानी की जा रही है।
केंद्र स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को सलाह दी है कि अगर Acute Encephalitis Syndrome या अज्ञात कारणों से तेज बुखार के मामले सामने आएं, तो निपाह की जांच पर विचार किया जाए, खासकर अगर मरीज का पश्चिम बंगाल से संपर्क इतिहास हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों का असर तभी होगा, जब स्थानीय स्तर पर सख्ती के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी Nipah virus airport screening सही ढंग से लागू की जाए।

एशिया के एयरपोर्ट्स पर बढ़ी सतर्कता

भारत में स्थिति सामने आने के बाद एशिया के कई देशों ने तुरंत एहतियाती कदम उठाए। थाईलैंड, नेपाल और ताइवान ने अपने एयरपोर्ट्स पर भारत से आने वाले यात्रियों की विशेष जांच शुरू कर दी है।
थाईलैंड में प्रभावित क्षेत्रों से आने वाली उड़ानों पर थर्मल स्कैनिंग, लक्षण जांच और संदिग्ध मामलों को अलग रखने की व्यवस्था की गई है।

नेपाल ने काठमांडू एयरपोर्ट पर हेल्थ डेस्क फिर से सक्रिय कर दिए हैं। यहां यात्रियों का तापमान मापा जा रहा है, यात्रा इतिहास लिया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर मौके पर ही मेडिकल जांच की जा रही है।
ताइवान ने भी पश्चिम बंगाल से आने या वहां से ट्रांजिट लेकर आने वाले यात्रियों के लिए लक्षण-आधारित Nipah virus airport screening और सेल्फ-मॉनिटरिंग गाइडलाइंस जारी की हैं।

वियतनाम और चीन जैसे देशों ने भी अपने पब्लिक हेल्थ सिस्टम को अलर्ट पर रखा है, हालांकि वहां अब तक कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। कोविड-19 के दौरान तैयार की गई सुविधाओं को फिर से सक्रिय करना कई देशों के लिए आसान साबित हुआ है।

यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए

स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि आम यात्रियों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।
अगर कोई व्यक्ति हाल ही में पश्चिम बंगाल या निपाह प्रभावित इलाके से यात्रा कर रहा है, तो उसे 21 दिनों तक बुखार, सिरदर्द, भ्रम, दौरे या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए।

लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर या स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क करने और अपना यात्रा इतिहास साझा करने की सलाह दी जा रही है।
इसके अलावा कच्चे खजूर के रस और जंगली जानवरों के संपर्क से बचने को कहा गया है। अस्पतालों में काम करने वाले स्टाफ और मरीजों की देखभाल करने वालों को मास्क और PPE के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।

क्या यह स्थिति कोविड जैसी बन सकती है

निपाह वायरस को WHO और अन्य वैश्विक एजेंसियां “महामारी क्षमता” वाले रोगजनकों में गिनती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में निपाह का फैलाव कोविड-19 जैसा तेज़ नहीं है, क्योंकि यह आमतौर पर नज़दीकी संपर्क से फैलता है।
फिर भी, अंतरराष्ट्रीय यात्रा बढ़ने के कारण जोखिम को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इसी वजह से एशिया के कई देशों में Nipah virus airport screening को एक एहतियाती कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह सीमाओं पर एक शुरुआती फिल्टर की तरह काम करता है, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य प्रणालियों को तैयारी का समय मिल सके।

आगे की तस्वीर क्या कहती है

फिलहाल स्वास्थ्य अधिकारियों को उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल में संक्रमण सीमित रहेगा और नए मामलों की संख्या नहीं बढ़ेगी। लेकिन जब तक सभी कॉन्टैक्ट्स की निगरानी पूरी नहीं हो जाती, तब तक सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।
एशिया के एयरपोर्ट्स पर लागू की गई Nipah virus airport screening आने वाले हफ्तों तक जारी रह सकती है, खासकर तब तक, जब तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ जाती।

इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक यात्रा के दौर में किसी भी स्थानीय संक्रमण का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी तेजी से महसूस किया जा सकता है। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार मानी जा रही है।

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