Kolkata Earthquake: म्यांमार में आए 5.9 तीव्रता के भूकंप से कोलकाता तक हिले घर, बांग्लादेश में भी महसूस हुए झटके

Kolkata Earthquake की खबर ने सोमवार शाम पूर्वी भारत में अचानक हलचल पैदा कर दी। 3 फरवरी 2026 की शाम पश्चिमी म्यांमार में आए 5.9 तीव्रता के भूकंप के झटके कोलकाता, पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के कई हिस्सों में महसूस किए गए। अचानक आए कंपन से लोग घबरा गए और कई जगहों पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि Kolkata Earthquake से जुड़ी इस घटना में अब तक किसी जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

Kolkata Earthquake की वजह क्या रही

भूवैज्ञानिक एजेंसियों के मुताबिक, Kolkata Earthquake दरअसल म्यांमार में आए भूकंप का असर था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार यह भूकंप 15:34 GMT यानी भारतीय समय के अनुसार रात करीब 9:04 बजे आया। भूकंप का केंद्र म्यांमार के रखाइन राज्य में Sittwe के पास बताया गया, जो शहर से करीब 70 मील पूर्व में स्थित है। इसकी तीव्रता 5.9 मापी गई।

USGS ने भूकंप की गहराई लगभग 62.7 किलोमीटर बताई, जबकि यूरोपीय एजेंसियों EMSC और GFZ के अनुसार इसकी गहराई 10 से 27 किलोमीटर के बीच थी। विशेषज्ञों का कहना है कि कम गहराई की वजह से भूकंप के झटके ज्यादा दूर तक महसूस हुए और इसी कारण Kolkata Earthquake जैसी स्थिति बनी।

कोलकाता में लोगों ने कैसे महसूस किए झटके

Kolkata Earthquake के दौरान शहर के कई इलाकों में रहने वाले लोगों ने बताया कि कुछ सेकंड के लिए इमारतें हिलती हुई महसूस हुईं। खासकर ऊंची इमारतों में रहने वालों को झटके ज्यादा साफ महसूस हुए। कुछ लोगों ने एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकलना बेहतर समझा।

दक्षिण और मध्य कोलकाता के कई हिस्सों से भी हल्के झटकों की खबरें सामने आईं। हालांकि किसी भी इलाके से इमारतों में दरार या नुकसान की सूचना नहीं मिली। प्रशासन ने तुरंत स्थिति का जायजा लिया और बताया कि Kolkata Earthquake से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भूकंप का केंद्र भारत से बाहर था।

बांग्लादेश और पूर्वोत्तर भारत में असर

Kolkata Earthquake का असर सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रहा। पश्चिम बंगाल के कुछ अन्य जिलों, मणिपुर की राजधानी Imphal और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भी लोगों ने हल्के झटके महसूस किए। बांग्लादेश की राजधानी Dhaka समेत कई इलाकों में भी भूकंप का असर देखा गया।

बांग्लादेशी अधिकारियों ने कहा कि झटके हल्के थे और किसी तरह की क्षति की खबर नहीं है। भारत के National Centre for Seismology (NCS) और India Meteorological Department (IMD) ने भी पुष्टि की कि Kolkata Earthquake का कारण म्यांमार में आया भूकंप ही था।

आफ्टरशॉक ने बढ़ाई चिंता

म्यांमार में मुख्य भूकंप के करीब 17 मिनट बाद 5.2 तीव्रता का एक आफ्टरशॉक भी दर्ज किया गया। हालांकि इसका असर कोलकाता तक नहीं पहुंचा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आफ्टरशॉक्स की वजह से इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है।

USGS के शुरुआती आकलन के मुताबिक, करीब 1.5 करोड़ लोग इस भूकंप से किसी न किसी स्तर पर प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। इनमें से लगभग 11 हजार से ज्यादा लोगों ने मध्यम स्तर के झटके महसूस किए। इसी वजह से Kolkata Earthquake को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा होती रही।

म्यांमार की स्थिति और बढ़ी चिंता

Kolkata Earthquake की जड़ म्यांमार में आए भूकंप से जुड़ी है और म्यांमार पहले से ही मुश्किल हालात से गुजर रहा है। रखाइन राज्य राजनीतिक संघर्ष, मानवीय संकट और कमजोर बुनियादी ढांचे से प्रभावित रहा है। ऐसे में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा चिंता बढ़ाने वाली है।

हालांकि इस भूकंप में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उथली गहराई वाले भूकंप पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा पैदा कर सकते हैं। Sittwe तटीय इलाका होने की वजह से शुरुआत में सुनामी को लेकर भी सतर्कता बरती गई, लेकिन किसी तरह की सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गई।

पहले भी आ चुके हैं बड़े भूकंप

Kolkata Earthquake ने लोगों को 2025 में म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप की याद दिला दी। Sagaing क्षेत्र में आए उस 7.7 तीव्रता के भूकंप में हजारों लोगों की जान चली गई थी और बड़े पैमाने पर तबाही हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार म्यांमार दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है।

Indo-Burmese Arc और भूकंपीय गतिविधि

भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, Kolkata Earthquake के पीछे का कारण Indo-Burmese Arc है। यह करीब 1,300 किलोमीटर लंबा टेक्टोनिक क्षेत्र है, जहां भारतीय प्लेट बर्मा प्लेट के नीचे धंसती है। इसी प्रक्रिया की वजह से इस क्षेत्र में बार-बार भूकंप आते हैं।

Sagaing Fault भी म्यांमार में भूकंप का एक बड़ा कारण माना जाता है। हाल के दिनों में इस इलाके में 4.0 से ज्यादा तीव्रता के कई छोटे भूकंप दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा Kolkata Earthquake सामान्य टेक्टोनिक गतिविधि का हिस्सा है और इसे किसी बड़े भूकंप का संकेत नहीं माना जा सकता, जब तक लगातार झटकों का सिलसिला न बढ़े।

प्रशासन की अपील और सावधानियां

Kolkata Earthquake के बाद भारत और बांग्लादेश की आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि अगर भूकंप के दौरान झटके महसूस हों तो खुले स्थान में जाना बेहतर होता है और अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पहले से ही भूकंप को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते रहे हैं, जिसका असर इस बार भी दिखा। मजबूत इमारतों और निर्माण नियमों की वजह से Kolkata Earthquake के दौरान किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई।

आगे क्या कहते हैं विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि Kolkata Earthquake जैसी घटनाएं इस क्षेत्र में असामान्य नहीं हैं। भारत, म्यांमार और बांग्लादेश को मिलकर भूकंप-रोधी ढांचे, बेहतर निगरानी और चेतावनी प्रणाली पर काम करना होगा।

फिलहाल हालात सामान्य बताए जा रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिक एजेंसियां म्यांमार और आसपास के इलाकों में आफ्टरशॉक्स पर नजर बनाए हुए हैं। Kolkata Earthquake ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तैयारी और सतर्कता बेहद जरूरी है।

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