Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, 4 फरवरी तक सरेंडर करने को कहा

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case में दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी 2026 को शाम 4 बजे तक जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया है। यह आदेश उस लंबे समय से चल रहे Rajpal Yadav Cheque Bounce Case से जुड़ा है, जिसमें पहले उन्हें कुछ राहत दी गई थी, लेकिन बार-बार शर्तों का पालन न करने के चलते अदालत ने अब सख्त रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा कि राजपाल यादव ने कोर्ट को दिए गए आश्वासनों का बार-बार उल्लंघन किया है। अदालत ने उनकी इस प्रवृत्ति को “निंदनीय” बताया और कहा कि अब और ढील देने का कोई कारण नहीं बचता।

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case की शुरुआत कैसे हुई

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case की जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। आरोप है कि राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधिका यादव ने फिल्म निर्माण से जुड़े एक प्रोजेक्ट के लिए M/s Murali Projects Pvt Ltd से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसके बदले उन्होंने पोस्ट-डेटेड चेक दिए, लेकिन जब ये चेक बैंक में लगाए गए तो अपर्याप्त राशि के कारण बाउंस हो गए।

इसके बाद कंपनी ने Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत मामला दर्ज कराया। यह वही कानून है, जिसके तहत चेक बाउंस को एक आपराधिक अपराध माना जाता है। Rajpal Yadav Cheque Bounce Case धीरे-धीरे कोर्ट की अलग-अलग सीढ़ियां चढ़ता गया।

निचली अदालत से हाई कोर्ट तक का सफर

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case में अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को छह-छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई और साथ ही शिकायतकर्ता को 9.28 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया। यह राशि मूल चेक अमाउंट और ब्याज को मिलाकर तय की गई थी।

इसके बाद 2019 में सेशंस कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके खिलाफ राजपाल यादव दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे। जून 2024 में हाई कोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए कहा था कि अगर राजपाल यादव ईमानदारी से समझौते की कोशिश करेंगे और भुगतान करेंगे तो उन्हें राहत मिल सकती है।

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राहत मिली, लेकिन शर्तें पूरी नहीं हुईं

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case में यही वह मोड़ था, जहां अभिनेता को मौका दिया गया था। कोर्ट ने कई बार तारीख बढ़ाई, मध्यस्थता की कोशिशें हुईं, लेकिन भुगतान की तय समय-सीमा पूरी नहीं की गई। सुनवाई के दौरान खुद राजपाल यादव की ओर से यह माना गया कि देनदारी मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद रकम जमा नहीं हो सकी।

2 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने सजा पर लगी रोक को खत्म कर दिया। अदालत ने कहा कि बार-बार आश्वासन देने और फिर उन्हें पूरा न करने से न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान नहीं होता।

सरेंडर का आदेश और अगली सुनवाई

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case में हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि राजपाल यादव 4 फरवरी 2026 को शाम 4 बजे तक सरेंडर करें। उनके वकील ने मुंबई में शूटिंग प्रतिबद्धताओं का हवाला दिया, जिस पर कोर्ट ने सीमित समय की छूट दी। साथ ही, जो भी राशि अब तक जमा की गई थी, उसे शिकायतकर्ता कंपनी को जारी करने का आदेश दिया गया।

इस मामले में अगली सुनवाई 5 फरवरी को रखी गई है, जहां कोर्ट अनुपालन रिपोर्ट पर विचार करेगा।

कोर्ट की टिप्पणी क्यों अहम है

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case में अदालत की टिप्पणी सिर्फ इस एक मामले तक सीमित नहीं मानी जा रही। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस वजह के बार-बार समय मांगना और आदेशों का पालन न करना स्वीकार्य नहीं है। इससे न सिर्फ शिकायतकर्ता को नुकसान होता है, बल्कि पूरे न्याय तंत्र की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

अदालत ने साफ संकेत दिया कि अगर असाधारण परिस्थिति न हो तो अब और राहत नहीं दी जाएगी।

राजपाल यादव का करियर और पुरानी कानूनी परेशानियां

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case के चलते एक बार फिर अभिनेता की निजी जिंदगी सुर्खियों में है। राजपाल यादव ने ‘हंगामा’, ‘चुप चुप के’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी फिल्मों से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई थी। उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और लंबे समय तक कॉमेडी रोल्स के लिए जाने जाते रहे।

हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब वह किसी चेक बाउंस मामले में जेल गए हों। साल 2013 में भी एक अन्य Rajpal Yadav Cheque Bounce Case में उन्हें करीब 25 दिन तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था। उस मामले में मुंबई के एक फाइनेंसर से जुड़े विवाद में बाद में समझौता हुआ था।

शिकायतकर्ता कंपनी का पक्ष

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case में शिकायतकर्ता M/s Murali Projects Pvt Ltd एक निर्माण कंपनी है, जिसने फिल्म निर्माण में निवेश के तौर पर यह रकम दी थी। कंपनी का कहना है कि उसने कई साल तक भुगतान का इंतजार किया और हर कानूनी रास्ता अपनाया।

हालांकि कुछ आंशिक भुगतान हुए हैं, लेकिन अदालत द्वारा तय की गई पूरी राशि अब तक नहीं मिल सकी है। इसी वजह से कंपनी ने सख्त रुख बनाए रखा और मामले को अंत तक पहुंचाया।

फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case के फैसले के बाद फिल्म इंडस्ट्री में भी हलचल है। कुछ निर्माताओं का कहना है कि इससे चल रही शूटिंग और प्रमोशनल गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन ज्यादातर लोग कानून के फैसले को सही मान रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी लोग इस मामले पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई यूजर्स पुराने कॉमेडी सीन शेयर करते हुए इस खबर पर टिप्पणी कर रहे हैं। हालांकि राजपाल यादव की टीम की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

आगे क्या हो सकता है

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case में अगर राजपाल यादव समय पर सरेंडर करते हैं, तो उन्हें छह महीने की सजा का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि कानून में यह भी प्रावधान है कि अगर पूरा भुगतान हो जाता है और समझौता होता है, तो सजा में राहत मिल सकती है।

यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि नाम और पहचान से ऊपर कानून होता है। Rajpal Yadav Cheque Bounce Case आने वाले दिनों में फिल्म इंडस्ट्री और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना रहेगा।

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