Surprise Missile Attacks: मिडिल ईस्ट में चल रहा ईरान-इजरायल युद्ध अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। Iran ने दावा किया है कि उसने Israel के प्रधानमंत्री के दफ्तर को “Surprise Missile Attacks” में निशाना बनाया। Iran के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि इन Surprise Missile Attacks में Netanyahu’s Office और एयर फोर्स कमांडर के मुख्यालय को टारगेट किया गया। हालांकि Israel ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि किसी तरह की हताहत की खबर नहीं है और प्रधानमंत्री सुरक्षित हैं।
IRGC के टेलीग्राम बयान के मुताबिक यह हमला “Surprise Missile Attacks” की 10वीं लहर का हिस्सा था, जो शनिवार से जारी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा बताया जा रहा है। Iran का कहना है कि यह कदम US-Israel द्वारा Iran पर किए गए हवाई हमलों का जवाब है।
क्या कहा IRGC ने?
IRGC ने फार्स न्यूज एजेंसी के जरिए बयान जारी कर कहा कि “जियोनिस्ट रीजिम” के प्रधानमंत्री का दफ्तर और एयर फोर्स कमांडर का हेडक्वार्टर Surprise Missile Attacks में निशाना बनाया गया। Iran ने दावा किया कि इस हमले में खैबर शेकन बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ, जिनकी रेंज करीब 1450 किलोमीटर बताई जाती है।
Iran की मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि Netanyahu की “स्थिति स्पष्ट नहीं” है। हालांकि Israel के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने साफ किया कि Netanyahu सुरक्षित हैं और युद्ध नियंत्रण कक्ष से हालात की निगरानी कर रहे हैं।
Israel की सेना ने यह भी पुष्टि की कि तेल अवीव में एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम सक्रिय किया गया था। अधिकारियों के अनुसार मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
Also read
Is Ali Khamenei really dead? लकी बिष्ट के दावे ने खड़ा किया बड़ा सवाल
युद्ध की पृष्ठभूमि
यह संघर्ष उस समय और तेज हो गया जब Ayatollah Ali Khamenei की हत्या के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। इसके बाद US और Israel ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत तेहरान, नतांज न्यूक्लियर साइट और IRGC के कई ठिकानों पर हमले किए।
Iran का कहना है कि उसके कई वरिष्ठ कमांडर और टॉप लीडर्स मारे गए। इसके बाद Iran ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू किए। कुवैत में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत की खबर आई, जबकि Iran में 115 लोगों के मारे जाने की बात कही गई है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।
इन घटनाओं के बीच Surprise Missile Attacks का दावा सामने आया, जिसने हालात को और जटिल बना दिया।
खाड़ी क्षेत्र में फैलता तनाव
न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक यह युद्ध अब सिर्फ Iran और Israel तक सीमित नहीं रहा। दुबई, बहरीन, इराक और अन्य जगहों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
लेबनान से हिजबुल्लाह ने Israel पर रॉकेट दागे, जिसके जवाब में Israel ने बेरूत के बाहरी इलाकों में बमबारी की। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 31 लोगों की मौत हुई है।
IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने नतांज परमाणु साइट पर हमले को “रेडियोलॉजिकल रिस्क” बताया, हालांकि Iran की ओर से इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई।
अमेरिका और ट्रंप की प्रतिक्रिया
अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने Truth Social पर पोस्ट कर कहा कि Iran के हमले नाकाम हो रहे हैं और अमेरिकी सेना मजबूत स्थिति में है।
US-Israel ने Iran के मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम और नौसेना के कुछ जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया है।
इन सबके बीच Surprise Missile Attacks की खबर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को और गर्म कर दिया है।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं
संयुक्त राष्ट्र ने आपात बैठक बुलाई है। सऊदी अरब और UAE ने Iran को चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में न डाले।
चीन ने अपने नागरिकों को Iran से लैंड रूट के जरिए निकलने की सलाह दी है। भारत ने संयम बरतने की अपील की है और वहां फंसे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
Reuters और Al Jazeera की रिपोर्ट्स के अनुसार Iran में एक लीडरशिप काउंसिल ने कमान संभाली है, लेकिन उत्तराधिकारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
तेल बाजार और भारत पर असर
होर्मुज स्ट्रेट पर खतरे की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में अगर संघर्ष लंबा चलता है तो महंगाई बढ़ सकती है।
विदेशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों के परिवार भी चिंतित हैं। छोटे शहरों और कस्बों तक इस युद्ध की खबरों का असर देखा जा रहा है।
क्या Netanyahu को नुकसान हुआ?
Surprise Missile Attacks के दावे के बावजूद Israel की ओर से साफ कहा गया है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित हैं। अभी तक किसी स्वतंत्र स्रोत से Netanyahu को चोट लगने की पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के दौरान इस तरह के दावे मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए भी किए जाते हैं। फिर भी Surprise Missile Attacks की खबर ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या?
इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह संघर्ष और बढ़ेगा या कूटनीतिक रास्ता निकलेगा। संयुक्त राष्ट्र और कई देश शांति की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
Surprise Missile Attacks की खबर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हालात तेजी से बदल रहे हैं। Israel ने कहा है कि वह हर खतरे का जवाब देगा, जबकि Iran ने भी पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं।
दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल Netanyahu की स्थिति को लेकर सस्पेंस बना हुआ है और Surprise Missile Attacks की खबरें सुर्खियों में हैं।
मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी असर डाल रहा है। ऐसे में आने वाले दिन निर्णायक हो सकते हैं।