भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर पिछले कुछ दिनों से कई तरह की अटकलें लग रही थीं। कई बड़े नाम चर्चा में थे – कभी सौरव गांगुली का नाम उभरकर सामने आया, तो कभी हरभजन सिंह का। लेकिन आखिरकार रविवार (21 सितंबर) को इस दौड़ में सबसे आगे निकलकर सामने आए दिल्ली के पूर्व क्रिकेटर मिथुन मनहास। उन्होंने BCCI अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है और माना जा रहा है कि वह निर्विरोध चुने जाएंगे।
कौन हैं मिथुन मनहास?
45 साल के मिथुन मनहास घरेलू क्रिकेट में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने 1998 से 2016 तक फैले अपने करियर में 157 फर्स्ट-क्लास मैच खेले। 18 साल लंबे इस सफर में उन्होंने दिल्ली की ओर से लंबे समय तक खेला और बाद में जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के साथ प्रशासनिक भूमिका भी निभाई।
दिल्ली और फिर JKCA के अनुभव ने उन्हें न सिर्फ मैदान पर बल्कि क्रिकेट प्रशासन में भी मजबूत पहचान दी। यही वजह है कि जब JKCA ने उन्हें BCCI अध्यक्ष पद के लिए नामित किया, तो दिल्ली की लॉबी ने भी उनका समर्थन किया।
चुनाव की हलचल और अंतिम दिन का ड्रामा
BCCI के चुनाव की प्रक्रिया में रविवार नामांकन का आखिरी दिन था। इसी दिन तय हुआ कि कौन-कौन अपनी दावेदारी पेश करेगा। मिथुन मनहास ने अध्यक्ष पद के लिए कागज़ात भरे और उनके सामने कोई बड़ा नाम खड़ा नहीं हुआ। इस तरह उनके निर्विरोध चुने जाने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है।
दूसरी ओर, पूर्व भारतीय टेस्ट क्रिकेटर रघुराम भट्ट भी अध्यक्ष पद की दौड़ में बने रहे, लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होंने खजांची (ट्रेज़रर) पद के लिए नामांकन दाखिल किया। उन्होंने कहा कि वे भारतीय क्रिकेट और BCCI के लिए अपनी भूमिका में पूरी कोशिश करेंगे।
अन्य पदों पर भी नई तस्वीर
- सेक्रेटरी: देवजीत सैकिया ने इस पद के लिए नामांकन किया।
- जॉइंट सेक्रेटरी: प्रभतेज भाटिया ने दावेदारी की और उन्हें मौका भी मिल गया। इससे पहले यह जिम्मेदारी रोहन देसाई के पास थी, लेकिन गोवा क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के चुनाव में उनकी गुटबाज़ी हार गई और इस वजह से उनका बोर्ड में टिकना मुश्किल हो गया।
- ट्रेज़रर: रघुराम भट्ट इस पद पर चुने जाएंगे।
अरुण धूमल को लेकर संशय
आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल की स्थिति को लेकर भी शुरुआत में असमंजस था। चर्चा थी कि वे “कूलिंग-ऑफ” नियम के दायरे में आते हैं या नहीं। बाद में BCCI ने कानूनी राय ली और साफ हुआ कि वे अपना पद जारी रख सकते हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया था।
गांगुली और हरभजन का नाम क्यों चर्चा में रहा?
पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का नाम आखिरी समय तक चर्चा में रहा। कई लोगों का मानना था कि उनकी वापसी हो सकती है। इसी तरह हरभजन सिंह का नाम भी सामने आया, जो फिलहाल राजनीति और क्रिकेट कमेंट्री दोनों में सक्रिय हैं। लेकिन आखिरकार बाज़ी मिथुन मनहास के हाथ लगी और उन्हें दिल्ली की सियासत और क्रिकेट लॉबी का समर्थन मिल गया।
दिल्ली में हुई बड़ी बैठक
नामांकन से पहले शनिवार रात दिल्ली में एक बड़ी मीटिंग हुई थी। यह बैठक एक केंद्रीय मंत्री के घर पर हुई, जहां BCCI के लगभग सभी बड़े अधिकारी मौजूद थे। इनमें देवजीत सैकिया, जयेश जॉर्ज, राजीव शुक्ला और अरुण धूमल भी शामिल रहे।
इसके अलावा BCCI के वरिष्ठ चेहरे भी इस बैठक में दिखे। जैसे – सौराष्ट्र से पूर्व सचिव निरंजन शाह, तमिलनाडु से कासी विश्वनाथन (जो एन. श्रीनिवासन का प्रतिनिधित्व कर रहे थे) और कर्नाटक से ब्रजेश पटेल। ये सभी लोग भारतीय क्रिकेट की आंतरिक राजनीति में गहरी पकड़ रखते हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि सौरव गांगुली भी उसी समय दिल्ली में थे, लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि वे इस बैठक में मौजूद थे या नहीं।
राजीव शुक्ला का बयान
BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि मिथुन मनहास का क्रिकेटिंग बैकग्राउंड उन्हें इस पद तक लाने में अहम रहा है। उन्होंने बताया कि JKCA की ओर से नामांकन मिलने के बाद उन्हें दिल्ली से भी हरी झंडी मिल गई।
अब आगे क्या?
BCCI का चुनाव और वार्षिक आम बैठक (AGM) 28 सितंबर को होगी। हालांकि नामांकन प्रक्रिया के बाद अब तस्वीर साफ हो गई है और माना जा रहा है कि मिथुन मनहास निर्विरोध अध्यक्ष बन जाएंगे।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि BCCI में अक्सर बड़े नाम और चर्चित चेहरे शीर्ष पदों तक पहुंचते रहे हैं, लेकिन इस बार अपेक्षाकृत शांत और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले मिथुन मनहास को मौका मिल रहा है। यह संकेत है कि बोर्ड की राजनीति में फिलहाल दिल्ली और JKCA की पकड़ मजबूत है।
निष्कर्ष
BCCI अध्यक्ष का पद भारतीय क्रिकेट में सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि यहीं से टीम इंडिया के भविष्य की नीतियां तय होती हैं और आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंटों की दिशा भी नियंत्रित होती है। मिथुन मनहास का नाम भले ही गांगुली या हरभजन जैसे बड़े दिग्गजों की तरह ग्लैमरस न हो, लेकिन उनका लंबा घरेलू करियर और हालिया प्रशासनिक अनुभव उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए योग्य साबित करता है।
अब 28 सितंबर को AGM के औपचारिक ऐलान का इंतजार रहेगा, लेकिन भारतीय क्रिकेट की राजनीति में फिलहाल सबसे चर्चित नाम मिथुन मनहास ही हैं।