नॉर्थ 24 परगना के Hakimpur Border पर पिछले दो दिनों में अचानक हलचल बढ़ गई। शाम होते ही करीब 80–100 लोग अपने बोरिया-बिस्तर उठाते हुए बॉर्डर की तरफ बढ़ते दिखे। ये वही लोग हैं जो कई साल पहले गैर-कानूनी तरीके से भारत आए थे और अब Hakimpur Border के जरिए वापस बांग्लादेश लौटने की तैयारी कर रहे हैं।
दो दिन से इंतज़ार कर रहे लोगों को मिला ग्रीन सिग्नल
शनिवार शाम लगभग 5:45 बजे के आसपास माहौल तेज़ी से बदला। जानकारी मिली कि बीएसएफ की तरफ से ग्रीन सिग्नल दिया गया है, जिसके बाद सभी लोगों को लाइन में लगाया जाने लगा। कई परिवार दो–तीन दिन से खुले मैदान में इंतज़ार कर रहे थे कि कब उन्हें Hakimpur Border पार करने की अनुमति मिलेगी।
बोरिया-बिस्तर बांधते परिवारों में जल्दी और चिंता
Hakimpur Border के पास खड़े लोगों के चेहरे पर जल्दबाजी और घबराहट साफ नजर आ रही थी। कोई बोरा उठाते हुए भाग रहा था, कोई बच्चों को संभालते हुए लाइन ढूंढ रहा था। हर कोई लगातार एक-दूसरे से पूछ रहा था—“कैसे जाओगे?”, “कौन सी लाइन में खड़े हों?”, “कब बुलाएंगे?”
“हम चोरी-छिपे आए थे”—एक बुजुर्ग की दर्द भरी कहानी
एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बताया कि वे 2008–09 के आसपास चोरी-छिपे भारत आए थे। “हम न्यू टाउन में रहते थे… मशीन का काम करते थे, पेड़ काटने वाली मशीन चलाते थे,” उन्होंने बताया। उनका कहना था कि वे किसी दलाल को पैसे नहीं देते थे, बल्कि एक जानकार रास्ता दिखाने वाला था, जिसके साथ वे यहां पहुंचे।
कई सालों से उनका परिवार भारत में रह रहा था, लेकिन उनके पास भारत का एक भी दस्तावेज़ नहीं है—न आधार कार्ड, न राशन कार्ड, न कोई पहचान पत्र।
बांग्लादेश का पेपर है, भारत का नहीं
जब उनसे पूछा गया कि वापसी कैसे होगी, उन्होंने सीधा जवाब दिया—“बॉर्डर खोल दिया है… जाने की परमिशन मिल गया है। बांग्लादेश का पेपर है, इंडिया का नहीं।”
ऐसे कई परिवार Hakimpur Border पर मौजूद थे जिनके पास सिर्फ बांग्लादेश के पुराने कागज़ हैं और भारत से जुड़ा कोई दस्तावेज़ नहीं।
सरकार की कार्रवाई के बाद तेज हुई वापसी
कई लोगों ने बताया कि अब बिना दस्तावेज़ भारत में रहना संभव नहीं है, इसलिए उन्हें वापस भेजा जा रहा है। पिछले दो–तीन दिनों से सभी लोग इसी उम्मीद में बैठे थे कि बीएसएफ से ग्रीन सिग्नल कब मिलेगा। आज जैसे ही अनुमति मिली, भीड़ एक साथ Hakimpur Border की ओर बढ़ने लगी।
BSF द्वारा पूरी प्रक्रिया का पालन
स्थानीय लोगों के अनुसार रोज शाम को Hakimpur Border पर यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। पहले सभी को चेक पोस्ट के अंदर ले जाया जाता है, उनके दस्तावेज़ देखे जाते हैं, जिनके पास कागज़ नहीं होते उनके नाम दर्ज किए जाते हैं। इसके बाद उन्हें लाइन बनाकर बांग्लादेश की तरफ भेजा जाता है।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक—अनिश्चितता साफ दिखी
आज भी कई छोटे बच्चे अपने खिलौनों के साथ चल रहे थे। महिलाएँ बोरा सिर पर उठाए आगे बढ़ रही थीं और बुजुर्ग धीरे-धीरे लाइन में खड़े हो रहे थे। Hakimpur Border पर मौजूद इन परिवारों की आंखों में सिर्फ एक भावना थी—आगे क्या होगा इसकी चिंता।
न्यू टाउन और आसपास के इलाकों में मजदूरी करते थे ये लोग
बातचीत में पता चला कि यह लोग न्यू टाउन और आसपास के इलाकों में मजदूरी करते थे। कोई घर बनाने का काम करता था, कोई मशीन चलाता था, तो कुछ लोग घरेलू कामों में लगे थे। कई बच्चों का बचपन भारत में ही बीता है और अब वे पहली बार अपने मूल देश की ओर भेजे जा रहे हैं।
100 से ज्यादा लोग लौटे, प्रक्रिया जारी रहने के संकेत
शाम तक Hakimpur Border पर करीब 100 से ज्यादा लोग अपने सामान के साथ लाइन में खड़े दिखे। बीएसएफ कर्मचारियों ने सभी को एक-एक करके आगे भेजा।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में भी यही प्रक्रिया जारी रह सकती है, क्योंकि दस्तावेज़ न होने की वजह से और भी परिवारों को लौटना पड़ सकता है।
Hakimpur Border फिर चर्चा का केंद्र बना
पूरे घटनाक्रम ने Hakimpur Border को लगातार सुर्खियों में ला दिया है। यहां हर दिन ऐसे दृश्य देखने को मिल रहे हैं, जहां परिवार अपना सामान समेटकर बांग्लादेश की ओर बढ़ते दिखते हैं। प्रशासन की व्यवस्था के बावजूद, इन परिवारों के मन में डर और अनिश्चितता बनी हुई है।