भारत ने Ind vs Ban Asia Cup 2025 के सुपर फोर मुकाबले में 41 रन से जीत हासिल कर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया। जीत उम्मीद के मुताबिक थी, लेकिन जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में रही, वह थीं पांच छूटे हुए कैच। फैंस को नतीजे से खुशी जरूर मिली, मगर यह सवाल भी उठने लगा कि बड़े मैचों में ऐसी गलतियां कहीं भारी न पड़ जाएं।
अव्यवस्था में रणनीति
इस एशिया कप में भारतीय टीम ने एक अलग ही तरीका अपनाया है। बल्लेबाजों की पोजीशन लगातार बदली जा रही है, गेंदबाजों को नई जिम्मेदारियां दी जा रही हैं और खिलाड़ी कई बार अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर नजर आते हैं। इसका मकसद साफ है – वर्ल्ड कप से पहले हर परिस्थिति में तैयार रहना।
इसी वजह से टॉस हारने के बाद भी सूर्यकुमार यादव ने “पहले बल्लेबाजी करने में खुशी” जताई। ओमान के खिलाफ ऐसा प्रयोग हो चुका था, लेकिन दुबई में बांग्लादेश जैसी मजबूत टीम के सामने इसे दोहराना एक बड़ा कदम था।
बल्लेबाजी क्रम में बदलाव
Ind vs Ban Asia Cup 2025 के मैच में शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा ने तेज शुरुआत दिलाई और 77 रनों की साझेदारी की। लेकिन पहला विकेट गिरने के बाद सबको लगा कि या तो सूर्यकुमार यादव या संजू सैमसन नंबर तीन पर उतरेंगे। इसके बजाय शिवम दुबे आए।
सूर्यकुमार ने बाद में बताया कि बांग्लादेश के पास एक लेफ्ट आर्म स्पिनर और एक लेग स्पिनर था, इसलिए दुबे को 7 से 15 ओवर के बीच बल्लेबाजी के लिए सही माना गया। हालांकि यह प्रयोग काम नहीं आया।
दुबे, जो अब तक निचले क्रम में बल्लेबाजी और डेथ ओवर्स की गेंदबाजी के लिए तैयार किए जा रहे थे, यहां स्पिन हिटर की भूमिका में दिखे। सूर्यकुमार चौथे नंबर पर उतरे, हार्दिक पांड्या पांचवें पर आए और 29 गेंदों में 38 रन बनाकर पारी को गति दी। तिलक वर्मा और अक्षर पटेल का बल्ला नहीं चला और यहां लगा कि शायद टीम को जितेश शर्मा जैसे फिनिशर की कमी खल रही है, जो अभी तक बेंच पर हैं।
मुश्किल हालात
मैच की पिच नई थी और गेंद स्विंग भी कर रही थी। बाद में गेंद धीमी हो गई और आउटफील्ड भी भारी था। नतीजा यह रहा कि बाउंड्री निकालना बेहद मुश्किल हो गया। भारत ने पावरप्ले के बाद सिर्फ 5 चौके लगाए, जिनमें से चार हार्दिक पांड्या के बल्ले से आए। वहीं, बांग्लादेश ने चौकों से ज्यादा छक्के लगाए।
गेंदबाजी में भी प्रयोग
बल्लेबाजी ही नहीं, गेंदबाजी में भी टीम इंडिया लगातार बदलाव कर रही है। पाकिस्तान के खिलाफ जहां अक्षर पटेल ने सिर्फ एक ओवर डाला था और दुबे ने पूरा कोटा फेंका था, वहीं बांग्लादेश के खिलाफ अक्षर ने पूरे चार ओवर डाले और दुबे को सिर्फ 19वां ओवर मिला।
यह साफ दिख रहा है कि टीम किसी भी स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रही है।
छूटे हुए कैच – सबसे बड़ी चिंता
रणनीति के नाम पर बल्लेबाजी और गेंदबाजी में बदलाव समझ में आते हैं, लेकिन कैच छोड़ना किसी भी रणनीति का हिस्सा नहीं हो सकता। भारत ने इस एशिया कप में अब तक 12 कैच छोड़े हैं, जो किसी भी टीम से सबसे ज्यादा है।
Ind vs Ban Asia Cup 2025 के मैच में भी पांच कैच छूटे। वरुण चक्रवर्ती की गेंदबाजी पर अकेले चार कैच छूट चुके हैं।
वरुण ने मैच के बाद साफ कहा, “टीम वर्ल्ड कप तक के मिशन के लिए चुनी गई है, इसलिए हमें फील्डिंग पर काम करना होगा। आज के मैच के बाद फील्डिंग कोच के पास कहने के लिए बहुत कुछ होगा।”
दुबई की चुनौती
खिलाड़ियों ने दुबई स्टेडियम की रोशनी और मौसम को भी मुश्किल बताया। “रिंग ऑफ फायर” नाम से मशहूर फ्लडलाइट्स के नीचे गेंद कई बार नजरों से ओझल हो जाती है। इसके अलावा नमी की वजह से गेंद अचानक नीचे गिरती है और फील्डर कैच से चूक जाते हैं।
वरुण ने कहा, “इस स्तर पर बहाने काम नहीं आते। हमें सभी कैच पकड़ने होंगे क्योंकि अब फाइनल में पहुंच गए हैं और वहां कोई गलती नहीं होनी चाहिए।”
गहराई से मिल रही मदद
कैच छूटने के बावजूद टीम की गहराई ने कमी पूरी की। स्पिनरों ने बांग्लादेश की पारी को रोका और ओपनरों की साझेदारी ने स्कोर बोर्ड पर मजबूत नींव रख दी।
यही कहानी अब तक के टूर्नामेंट की भी रही है – बल्लेबाजी क्रम में लगातार फेरबदल, गेंदबाजी में अलग-अलग प्रयोग और फील्डिंग में गलतियां। लेकिन इन सबके बावजूद भारत फाइनल में पहुंच चुका है।
आगे का सबक
Ind vs Ban Asia Cup 2025 में जीत के साथ भारत ने फाइनल का टिकट तो हासिल कर लिया, लेकिन कैच छोड़ने जैसी गलतियों से सबक लेना जरूरी है। प्रयोग जरूरी हैं, पर फील्डिंग में लापरवाही कहीं महंगी न पड़ जाए।
फिलहाल टीम इंडिया अपनी रणनीति पर डटी हुई है। अव्यवस्था और बदलाव उनकी योजना का हिस्सा हैं, लेकिन अगर कैच पकड़ने में सुधार नहीं हुआ तो बड़े मुकाबलों में यही गलती हार का कारण बन सकती है।