‘हमारे पड़ोसी अच्छे नहीं हैं’: IIT Madras में Jaishankar का बड़ा बयान, India neighbourhood policy पर पाकिस्तान को सीधा संदेश

भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने शुक्रवार को IIT Madras में छात्रों से बातचीत के दौरान India neighbourhood policy को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर देश को अपने पड़ोसियों के साथ रहना पड़ता है, लेकिन कुछ पड़ोसी ऐसे होते हैं जो हालात को लगातार बिगाड़ते रहते हैं। जयशंकर के शब्दों में, “आपके पड़ोसी अच्छे भी हो सकते हैं और बुरे भी। दुर्भाग्य से हमारे कुछ पड़ोसी अच्छे नहीं हैं।” उनका इशारा साफ तौर पर Pakistan की ओर था।

पहलगाम हमले की पृष्ठभूमि में बयान

जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान रिश्ते और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी। भारत का आरोप है कि यह हमला पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचे की साजिश का नतीजा था। जयशंकर ने कहा कि जब कोई देश जानबूझकर, लगातार और बिना पछतावे के आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो उसके खिलाफ कदम उठाना जरूरी हो जाता है। India neighbourhood policy का मूल सिद्धांत ही यह है कि देश अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।

‘आतंकवाद के खिलाफ बचाव हमारा अधिकार’

IIT मद्रास में बोलते हुए विदेश मंत्री ने साफ कहा कि आतंकवाद के खिलाफ खुद को बचाने का अधिकार भारत का है। उन्होंने कहा, “अगर कोई देश आतंकवाद को अपनी नीति बना ले, तो हमारे पास अपने लोगों की रक्षा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता।” India neighbourhood policy के तहत भारत यह मानता है कि सुरक्षा सबसे ऊपर है। जयशंकर ने यह भी जोड़ा कि भारत अपने इस अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेगा, यह फैसला भारत खुद करेगा।

बाहरी दखल पर भारत का रुख

अपने बयान में जयशंकर ने रणनीतिक स्वायत्तता पर भी जोर दिया। हाल के महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान मध्यस्थता की बात कही थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जयशंकर ने कहा कि India neighbourhood policy में किसी तीसरे पक्ष के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “हमें कोई यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं।” भारत अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है और वही करेगा, जो उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी होगा।

सिंधु जल संधि पर भी दो टूक

जयशंकर ने अपने भाषण में Indus Waters Treaty का भी जिक्र किया, जो फिलहाल निलंबित है। उन्होंने कहा कि यह समझौता एक समय पर सद्भावना के आधार पर किया गया था, लेकिन अगर दशकों तक आतंकवाद चलता रहे, तो अच्छे पड़ोसी होने का दावा खोखला हो जाता है। उनके शब्दों में, “आप यह नहीं कह सकते कि पानी भी चाहिए और आतंकवाद भी जारी रहेगा।” India neighbourhood policy में यह साफ है कि सहयोग तभी संभव है, जब पड़ोसी देश भी जिम्मेदारी दिखाएं।

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संवाद बनाम यथार्थ

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने हमेशा संवाद और शांति का रास्ता चुना है, लेकिन अनुभवों ने सिखाया है कि सिर्फ बातचीत से हर समस्या हल नहीं होती। India neighbourhood policy अब आदर्शवाद से ज्यादा यथार्थ पर आधारित है। जयशंकर के मुताबिक, जब बार-बार हमले हों और चेतावनियों को नजरअंदाज किया जाए, तो सख्त रुख अपनाना जरूरी हो जाता है।

युवाओं के लिए संदेश

IIT मद्रास में छात्रों से बातचीत के दौरान जयशंकर ने खास तौर पर युवाओं को यह समझाने की कोशिश की कि विदेश नीति भावनाओं से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों से तय होती है। उन्होंने कहा कि India neighbourhood policy का मकसद सिर्फ टकराव नहीं, बल्कि संतुलन बनाना है। लेकिन यह संतुलन तभी संभव है, जब पड़ोसी देश भी शांति का रास्ता अपनाएं।

बदले दौर की पड़ोसी नीति

जयशंकर का बयान इस बात का संकेत है कि India neighbourhood policy अब एक नए दौर में है। इसमें सहयोग के दरवाजे खुले हैं, लेकिन आतंकवाद के लिए कोई नरमी नहीं है। भारत का संदेश साफ है कि अच्छे पड़ोसी होने के फायदे तभी मिलेंगे, जब पड़ोसी भी अच्छा व्यवहार करेंगे।

क्या है आगे की दिशा?

विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर के इस बयान से भारत की मौजूदा विदेश नीति की दिशा और स्पष्ट होती है। India neighbourhood policy अब सिर्फ कूटनीतिक शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ठोस कार्रवाई का संकेत भी है। आने वाले समय में यह नीति भारत-पाकिस्तान रिश्तों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।

कुल मिलाकर, IIT मद्रास में दिया गया जयशंकर का यह बयान सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि भारत की पड़ोसी नीति का स्पष्ट खाका है। India neighbourhood policy का संदेश साफ है—शांति की पहल होगी, लेकिन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं।

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