Islamabad Suicide Blast: जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद पर हमला, 30 से ज्यादा मौतें, राजधानी में दहशत

Islamabad suicide blast ने पाकिस्तान की राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को जुमे की नमाज के दौरान इस्लामाबाद के तरलाई कलां इलाके में स्थित शिया मस्जिद खदीजा तुल क़ुबरा पर हुए सुसाइड बम हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह हमला ऐसे वक्त पर हुआ जब मस्जिद में सैकड़ों लोग नमाज अदा कर रहे थे। राजधानी में इस तरह की घटना लंबे समय बाद सामने आई है, जिससे पूरे देश में चिंता और डर का माहौल है।

नमाज के वक्त हुआ हमला, चारों तरफ अफरा-तफरी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक Islamabad suicide blast दोपहर करीब एक बजे मस्जिद के मुख्य द्वार के पास हुआ। सुसाइड बॉम्बर ने खुद को उसी समय उड़ा लिया जब लोग मस्जिद के भीतर प्रवेश कर रहे थे। तेज धमाके के साथ मस्जिद की दीवारें और दरवाजे क्षतिग्रस्त हो गए। नमाज का माहौल पल भर में चीख-पुकार में बदल गया।

लोगों ने बताया कि धमाके के बाद जूते-चप्पल हर तरफ बिखरे पड़े थे और कई घायल लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश की।

पुलिस और प्रशासन की पुष्टि

इस्लामाबाद पुलिस के प्रवक्ता ताकी जवेद ने पुष्टि की कि यह एक सुसाइड अटैक था। शुरुआती घंटों में हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। कुछ रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या ज्यादा बताई गई, लेकिन बाद में प्रशासन ने साफ किया कि Islamabad suicide blast में 24 से 31 लोगों की मौत हुई है और 100 से ज्यादा लोग घायल हैं।

घायलों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां इमरजेंसी घोषित कर दी गई। डॉक्टरों के अनुसार कई घायलों की हालत गंभीर है, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

बचाव अभियान और फोरेंसिक जांच

धमाके के तुरंत बाद पुलिस, रेस्क्यू टीम और सेना की यूनिट्स मौके पर पहुंचीं। पूरे इलाके को सील कर दिया गया और बम निरोधक दस्ते ने जांच शुरू की। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने सबूत इकट्ठा किए ताकि यह पता लगाया जा सके कि विस्फोटक कितना शक्तिशाली था और इसे कहां रखा गया था।

यह Islamabad suicide blast नवंबर 2025 में हुए ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स हमले के बाद राजधानी में दूसरा बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल उठने लगे हैं।

हताहतों की तस्वीर और अस्पतालों का हाल

इस्लामाबाद प्रशासन के मुताबिक करीब 169 लोगों को अस्पतालों तक पहुंचाया गया। इनमें से कई को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, लेकिन दर्जनों मरीज अभी भी भर्ती हैं।

अस्पतालों में खून की कमी की खबरें भी सामने आईं, जिसके बाद नागरिकों से रक्तदान की अपील की गई। Islamabad suicide blast के बाद अस्पतालों के बाहर परिजनों की भीड़ देखी गई, जो अपनों की खबर पाने के लिए परेशान थे।

जिम्मेदारी किसकी? शक के घेरे में आतंकी संगठन

अब तक किसी संगठन ने आधिकारिक तौर पर Islamabad suicide blast की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, हमला शिया मस्जिद पर होने के कारण शक की सुई उन आतंकी संगठनों की ओर जा रही है, जो पहले भी शिया समुदाय को निशाना बनाते रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), लश्कर-ए-झांगवी और इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISK) जैसे संगठनों के एंगल से जांच कर रही हैं। पाकिस्तान में 2022 के बाद से TTP से जुड़ी हिंसक घटनाओं में तेज बढ़ोतरी देखी गई है।

पाकिस्तान में बढ़ता आतंकी संकट

Islamabad suicide blast ऐसे समय पर हुआ है जब पाकिस्तान पहले से ही आतंकी हिंसा की लहर से जूझ रहा है। 2026 की शुरुआत से ही बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में कई बड़े हमले हुए हैं।

जनवरी 2026 में बलूचिस्तान में हुए हमलों में 120 से ज्यादा लोग मारे गए थे। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसने हाल के महीनों में सैकड़ों आतंकियों को मारा है, लेकिन इसके बावजूद हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सरकार का रुख

प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने Islamabad suicide blast पर गहरा शोक जताया और इसे “कायराना हमला” बताया। उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए और सुरक्षा एजेंसियों को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा।

इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी ने सेना और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाने की बात कही। वहीं विपक्षी दलों ने राजधानी में इस तरह के हमले को गंभीर सुरक्षा चूक बताया और सरकार से जवाब मांगा।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय असर

इस हमले की निंदा कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने की है। संयुक्त राष्ट्र और विदेशी दूतावासों ने भी Islamabad suicide blast को लेकर चिंता जताई है।

पाकिस्तानी राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने एक बार फिर आरोप लगाया कि आतंकी गतिविधियों के पीछे विदेशी हाथ हो सकता है, हालांकि पड़ोसी देशों ने इन आरोपों को खारिज किया है। यह घटना पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और प्रभावित कर सकती है।

तरलाई कलां इलाका क्यों बना निशाना

तरलाई कलां, दक्षिण-पूर्वी इस्लामाबाद का शिया बहुल इलाका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत कमजोर रहती है। शहजाद टाउन के पास स्थित इस मस्जिद में पहले भी बड़ी भीड़ जुटती रही है।

Islamabad suicide blast के बाद इस इलाके में 16 घंटे तक सर्च और क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया गया ताकि किसी और खतरे को टाला जा सके।

आगे की राह और सवाल

इस्लामाबाद जैसे हाई-सिक्योरिटी शहर में Islamabad suicide blast ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकी नेटवर्क पर पूरी तरह लगाम नहीं लगेगी, तब तक ऐसे हमलों को रोकना मुश्किल होगा।

फिलहाल जांच जारी है और पीड़ित परिवार इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यह हमला सिर्फ पाकिस्तान के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए एक गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

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