NASA ने exoplanet की खोज को तेज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक नया कदम आगे बढ़ाया है। NASA का deep-learning मॉडल ExoMiner++ AI अब Transiting Exoplanet Survey Satellite (TESS) के बड़े डेटा आर्काइव को खंगाल रहा है। मकसद साफ है—पास के तारों के आसपास ऐसे ग्रहों के संकेत ढूंढना, जो आकार और परिस्थितियों में Earth-like हो सकते हैं। NASA के मुताबिक ExoMiner++ AI ने TESS डेटा से करीब 7,000 exoplanet candidates को चिन्हित किया है। ये सभी अभी “कैंडिडेट” हैं, यानी उनकी पुष्टि के लिए आगे की जांच जरूरी होगी, लेकिन इससे वैज्ञानिकों के पास फॉलो-अप के लिए संभावित टारगेट्स की सूची काफी बढ़ गई है।
यहां एक और अहम बात है—ExoMiner++ AI को Kepler और TESS, दोनों के डेटा पर ट्रेन किया गया है। यानी यह मॉडल पुराने और नए डेटा पैटर्न दोनों को समझकर काम करता है।
ExoMiner++ AI आखिर करता क्या है?
ExoMiner++ AI एक deep-learning neural network मॉडल है, जिसे NASA के Ames Research Center (California के Silicon Valley इलाके में) की टीम ने विकसित किया। यह मॉडल तारों की light curves को पढ़ता है—यानी समय के साथ किसी तारे की चमक में होने वाले उतार-चढ़ाव के ग्राफ। जब कोई ग्रह अपने होस्ट स्टार के सामने से गुजरता है, तो तारे की चमक में बहुत हल्की और नियमित “डिप” दिखती है। इसे transit कहा जाता है। ExoMiner++ AI इसी पैटर्न को पकड़कर संकेत निकालता है कि वहां ग्रह हो सकता है या नहीं।
लेकिन चुनौती सिर्फ डिप पकड़ना नहीं है। कई बार false positives भी ऐसे ही संकेत दे देते हैं—जैसे eclipsing binary stars, इंस्ट्रूमेंट नॉइज़, या कुछ astrophysical कारण। ExoMiner++ AI की खासियत बताई जाती है कि यह इन नकली संकेतों और असली ग्रहों के संकेतों में फर्क करने में मदद करता है। साथ में यह हर कैंडिडेट को confidence score भी देता है, ताकि वैज्ञानिक तय कर सकें कि किस सिग्नल को पहले फॉलो-अप के लिए चुना जाए।
यानी आसान भाषा में कहें तो ExoMiner++ AI एक तरह से “फिल्टर” और “प्रायोरिटी लिस्ट” तैयार करता है—जिससे इंसानों को हर एक सिग्नल को घंटों देखकर जांच करने का काम कम हो जाता है।
Kepler से TESS तक: पहले भी साबित हो चुका है मॉडल
ExoMiner की कहानी नई नहीं है। 2021 में ExoMiner मॉडल ने Kepler मिशन के डेटा से 370 नए exoplanets को validate करने में मदद की थी। इसी अनुभव के आधार पर ExoMiner++ AI तैयार किया गया, जिसे Kepler और TESS दोनों के डेटा पर ट्रेन किया गया और TESS के लिए ट्यून किया गया।
TESS के लिए यह अपग्रेड इसलिए जरूरी था क्योंकि TESS की observing strategy और डेटा में आने वाला नॉइज़ Kepler से अलग है। इसी वजह से ExoMiner++ AI को ऐसे तैयार किया गया कि वह TESS के बड़े डेटा में भी भरोसे के साथ संकेत छांट सके।
TESS इतना बड़ा डेटा-सोर्स क्यों है?
TESS को 2018 में लॉन्च किया गया था और इसका उद्देश्य लगभग पूरे आसमान का सर्वे करना है, खासकर ऐसे bright और nearby stars को देखना, जिन पर बाद में और विस्तार से स्टडी हो सके। Kepler की तुलना में TESS का स्कैनिंग एरिया बहुत बड़ा है, इसलिए यह light-curve डेटा भी बहुत ज्यादा मात्रा में बनाता है।
यही कारण है कि TESS का डेटा इंसान के लिए एक-एक करके देखना मुश्किल हो जाता है। यहां ExoMiner++ AI जैसे टूल काम आते हैं, जो कम समय में बड़े डेटा को स्कैन करके संभावित संकेतों की शॉर्टलिस्ट बना देते हैं।
एक और वजह यह भी है कि TESS का डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, इसलिए दुनिया भर के रिसर्चर्स—प्रोफेशनल एस्ट्रोनॉमर्स, यूनिवर्सिटी टीमें और कई बार citizen scientists भी—इस पर काम कर पाते हैं।
Open-source ExoMiner++ AI का मतलब क्या है?
ExoMiner++ AI को open-source के तौर पर उपलब्ध कराया गया है। इसका मतलब यह है कि रिसर्चर्स इसका कोड देख सकते हैं, मॉडल की बनावट समझ सकते हैं, अपने सिस्टम पर रन करके नतीजे दोहरा सकते हैं और जरूरत हो तो इसे दूसरे डेटा या मिशनों के लिए भी ढाल सकते हैं।
वैज्ञानिक समुदाय में open-source AI को इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि इससे transparency बढ़ती है, और अलग-अलग टीमें मिलकर मॉडल को बेहतर बना सकती हैं। इससे biases और गलतियों की पहचान करना भी आसान हो जाता है।
7,000 candidates का मतलब—क्या 7,000 नए ग्रह मिल गए?
यहां सबसे जरूरी बात यही है कि ExoMiner++ AI ने करीब 7,000 exoplanet candidates को चिन्हित किया है, confirmed planets को नहीं। यानी यह ऐसे संकेत हैं जिनमें ग्रह होने की संभावना दिखी है, लेकिन पक्की पुष्टि के लिए आगे की observations जरूरी होंगी।
आमतौर पर पुष्टि के लिए वैज्ञानिक follow-up में अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं—जैसे radial-velocity measurements या high-resolution imaging। इन तरीकों से यह पता चलता है कि सिग्नल वाकई ग्रह का है या किसी दूसरे कारण से बना है।
फिर भी, candidates की यह बड़ी सूची वैज्ञानिकों के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि इससे उन्हें एक “prioritized shortlist” मिल जाती है—कौन से targets पहले देखे जाएं। समय और संसाधन सीमित होते हैं, इसलिए ऐसी शॉर्टलिस्ट का महत्व काफी बढ़ जाता है।
और यही वह जगह है जहां Earth-like worlds की उम्मीद जुड़ती है। इन candidates में से कुछ आगे चलकर rocky, Earth-sized ग्रह या अपने स्टार के habitable zone में मौजूद ग्रह भी साबित हो सकते हैं। हालांकि यह अभी संभावना के स्तर पर है, क्योंकि final confirmation के बिना कोई दावा नहीं किया जा सकता।
आगे क्या—ExoMiner++ AI सिर्फ TESS तक सीमित रहेगा?
NASA का नजरिया यह है कि ExoMiner++ AI सिर्फ TESS तक सीमित टूल नहीं रहेगा। टीम ऐसे वर्जन पर भी काम कर रही है जो “raw telescope data” को सीधे पढ़ सके, न कि सिर्फ पहले से तैयार transit signal lists को। अगर यह दिशा सफल होती है तो discovery pipeline और तेज हो सकती है।
इसके अलावा आगे आने वाले मिशनों से डेटा की मात्रा और बढ़ने वाली है। उदाहरण के तौर पर Nancy Grace Roman Space Telescope से भविष्य में बहुत बड़े पैमाने पर observations आने की उम्मीद है। ऐसे में ExoMiner++ AI जैसे AI टूल वैज्ञानिकों के लिए जरूरी सहारा बन सकते हैं, ताकि डेटा की “भरमार” में भी नई खोजें धीमी न पड़ें।
AI-driven astronomy क्यों बदल रही है तस्वीर?
Exoplanet hunting में सबसे समय लेने वाला हिस्सा अक्सर “vetting” रहा है—यानी हजारों संकेतों में से यह तय करना कि असली क्या है और नकली क्या। ExoMiner++ AI उसी हिस्से को तेज करता है। इससे वैज्ञानिकों के पास ज्यादा समय बचता है, जिसे वे follow-up, confirmation और आगे characterization में लगा सकते हैं—जैसे ग्रह का mass, radius और orbit।
कुल मिलाकर, TESS के बड़े public data और ExoMiner++ AI जैसे tools मिलकर exoplanets की खोज को ज्यादा व्यवस्थित और तेज बना रहे हैं। Earth-like ग्रहों की खोज कब बड़ी खबर बनकर सामने आएगी, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन इतना साफ है कि अब इस खोज में इंसानों के साथ AI की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।