पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रही तनावपूर्ण स्थिति के बीच तुर्की के इस्तांबुल में दोनों देशों के बीच Pakistan-Afghanistan Talks का दूसरा दौर शुरू हुआ है। ये वार्ता ऐसे समय हो रही है जब कुछ दिन पहले सीमा पर हुए झड़पों में कई सैनिकों, नागरिकों और आतंकियों की मौत के बाद हालात युद्ध जैसे बन गए थे। हालांकि 19 अक्टूबर को दोहा में हुई पहली बातचीत के बाद अस्थायी रूप से शांति बहाल की गई थी।
इस बार Pakistan-Afghanistan Talks का मकसद सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने के लिए एक संयुक्त निगरानी प्रणाली (Joint Monitoring Mechanism) तैयार करना है। यह बैठक क़तर और तुर्की की मध्यस्थता में आयोजित की जा रही है।
🔹 पाकिस्तान ने दी “युद्ध” की चेतावनी
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस्तांबुल में चल रही Pakistan-Afghanistan Talks के दौरान चेतावनी दी है कि अगर बातचीत नाकाम रही, तो पाकिस्तान के पास “खुले युद्ध” के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा।
सियालकोट में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आसिफ ने कहा कि “अगर ये वार्ता सफल नहीं होती, तो हमें युद्ध का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। हालांकि हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष शांति का रास्ता ही चुनेंगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले चार से पांच दिनों में सीमा पर कोई नई झड़प नहीं हुई है और दोहा में हुई पहली बैठक में तय किए गए करीब 80 प्रतिशत बिंदुओं पर अमल किया जा रहा है।
🔹 पाकिस्तान का मुख्य मुद्दा: सीमा पार आतंकवाद
Pakistan-Afghanistan Talks में इस बार पाकिस्तान का मुख्य फोकस आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई पर है। पाकिस्तान ने अफगान तालिबान को एक विस्तृत “काउंटर टेररिज्म प्लान” सौंपा है।
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल टीटीपी (Tehreek-e-Taliban Pakistan) और बीएलए (Balochistan Liberation Army) जैसे संगठन पाकिस्तान में हमले करने के लिए कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने शुक्रवार को कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि इस बैठक में एक ठोस और सत्यापनीय मॉनिटरिंग मैकेनिज्म पर सहमति बनेगी ताकि अफगान जमीन से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोका जा सके।”
🔹 अफगानिस्तान का प्रतिनिधिमंडल और वार्ता का एजेंडा
Pakistan-Afghanistan Talks में अफगान प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई अफगान आंतरिक मंत्रालय के उप मंत्री मौलवी रहमतुल्लाह नजीब कर रहे हैं। उनके साथ अनस हक्कानी, जो अफगान गृह मंत्री के भाई हैं, भी मौजूद हैं।
अफगान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि “हम पाकिस्तान के साथ बचे हुए मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं। यह बैठक दोनों देशों के लिए आगे बढ़ने का मौका है।”
वार्ता का मुख्य उद्देश्य है –
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सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों को रोकना
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व्यापारिक बाधाओं को कम करना
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और एक दीर्घकालिक राजनीतिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना
🔹 “तीसरे पक्ष की निगरानी” की पेशकश
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार इस्लामाबाद एक तीसरे पक्ष की निगरानी प्रणाली (Third-party Oversight Structure) की मांग भी कर रहा है।
यह प्रणाली तुर्की और क़तर की संयुक्त देखरेख में काम कर सकती है ताकि वार्ता के दौरान तय किए गए समझौतों के पालन की निगरानी की जा सके।
देश के प्रमुख अख़बार ‘डॉन’ ने रिपोर्ट किया है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान से इस बात की ठोस गारंटी चाहता है कि टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को उसके इलाके से पूरी तरह खत्म किया जाएगा।
🔹 सीमा पर टकराव और बढ़ता अविश्वास
Pakistan-Afghanistan Talks का आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच दुरंड रेखा (Durand Line) पर लगातार तनाव बना हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों में यहां कई बार झड़पें हो चुकी हैं, जिसमें दोनों ओर के सैनिकों की मौत हुई है।
अफगानिस्तान तालिबान सरकार दुरंड रेखा को मान्यता देने से इंकार करती है, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है। यही मतभेद दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा करता जा रहा है।
🔹 भारत को लेकर भी बढ़ी नाराज़गी
इन Pakistan-Afghanistan Talks से पहले, अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की 9 अक्टूबर को शुरू हुई नई दिल्ली यात्रा को लेकर पाकिस्तान में काफी असंतोष देखा गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुत्ताकी की भारत यात्रा के पहले ही दिन काबुल में ड्रोन हमले हुए, जिन्हें पाकिस्तानी मीडिया ने संदेह की नजर से देखा।
इससे पहले पाकिस्तान ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इंडस वॉटर ट्रीटी को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। जवाब में अब अफगानिस्तान ने कुनार नदी पर बांध बनाने की योजना का ऐलान किया है, जिससे इस्लामाबाद की चिंता और बढ़ गई है।
🔹 अफगानिस्तान का जल प्रोजेक्ट और पाकिस्तान की बेचैनी
अफगान तालिबान के उप सूचना मंत्री मुहाजिर फराही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि तालिबान सुप्रीम लीडर हिबतुल्ला अखुंदजादा ने जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि “कुनार नदी पर बांध निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए और इसके लिए घरेलू कंपनियों से अनुबंध किए जाएं।”
कुनार नदी, जिसे पाकिस्तान में चितराल नदी कहा जाता है, दोनों देशों की साझा जलधारा है। यह पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान और चितराल के बीच स्थित ग्लेशियर से निकलती है और फिर अफगानिस्तान में प्रवेश करती है। बाद में यह काबुल नदी से मिल जाती है।
यह नदी हिंदूकुश पर्वत की बर्फ और ग्लेशियरों से पोषित होती है, और इसके जल बंटवारे को लेकर पहले भी कई विवाद हो चुके हैं।
🔹 “शांति की उम्मीद, लेकिन खतरा कायम”
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि Pakistan-Afghanistan Talks से इस बार कोई ठोस नतीजा निकलेगा जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति कायम हो सके। उन्होंने कहा कि “पिछली बैठक में मैंने अफगान प्रतिनिधिमंडल में शांति की इच्छा देखी थी, लेकिन अफसोस है कि अफगानों ने पाकिस्तान में आतंकवाद को समर्थन दिया, जबकि हमने उन्हें 40 साल तक शरण दी।”
इस बयान से साफ है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी गहराया हुआ है। अगर Pakistan-Afghanistan Talks असफल रहीं, तो स्थिति फिर से हिंसा की ओर लौट सकती है।
तुर्की में चल रही Pakistan-Afghanistan Talks सिर्फ दो देशों के बीच संवाद नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए अहम हैं। एक तरफ पाकिस्तान आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई चाहता है, तो दूसरी ओर अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता पर जोर दे रहा है।
अभी तक बातचीत का माहौल सकारात्मक बताया जा रहा है, लेकिन रक्षा मंत्री की “युद्ध” वाली चेतावनी इस बात का संकेत है कि अगर वार्ता असफल रही, तो आने वाले दिनों में हालात फिर बिगड़ सकते हैं।
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