Pakistan Taliban War: नूर खान एयरबेस पर ड्रोन हमला, ‘ओपन वॉर’ के बीच भारत की सख्त चेतावनी

Pakistan Taliban War अब केवल सीमा झड़पों तक सीमित नहीं रह गया है। ड्यूरंड लाइन पर शुरू हुई गोलीबारी और हवाई हमलों की यह श्रृंखला अब खुले युद्ध में बदलती दिख रही है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान (तालिबान) के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि तालिबान ने रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है, जबकि पाकिस्तान ने इसे सिरे से खारिज किया है। इसी बीच भारत ने भी कड़ा संदेश देकर इस Pakistan Taliban War को और अहम बना दिया है।

सीमा पर तेज हुई लड़ाई

Pakistan Taliban War की शुरुआत हालिया हवाई हमलों से हुई। 21 फरवरी 2026 को पाकिस्तान वायुसेना ने अफगानिस्तान के नंगरहर, पक्तिका और खोस्त प्रांतों पर हमले किए। इस्लामाबाद का कहना था कि यह कार्रवाई TTP और ISIS-K के ठिकानों के खिलाफ थी, जिन्हें पाकिस्तान में हालिया हमलों का जिम्मेदार माना गया।

लेकिन अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इसे सीधे तौर पर अपनी संप्रभुता पर हमला बताया। 26 फरवरी को तालिबान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की। नंगरहर, नूरिस्तान, कुनर, खोस्त, पक्तिया और पक्तिका में पाकिस्तानी सीमा चौकियों को निशाना बनाया गया। तालिबान का दावा है कि इस जवाबी हमले में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया।

पाकिस्तान ने इन दावों को गलत बताया और “ऑपरेशन गजब लिल हक” शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत काबुल सहित कई अफगान इलाकों में हवाई हमले किए गए। 27 फरवरी को पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से “ओपन वॉर” की घोषणा कर दी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह दोनों पड़ोसियों के बीच अब तक की सबसे गंभीर सैन्य टकराहट मानी जा रही है। यही वह मोड़ है जहां Pakistan Taliban War ने पूरी तरह युद्ध का रूप ले लिया।

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नूर खान एयरबेस पर दावा

Pakistan Taliban War के बीच सबसे बड़ी खबर तब आई जब तालिबान ने दावा किया कि उनके ड्रोन इस्लामाबाद तक पहुंचे और रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया। नूर खान एयरबेस पाकिस्तान का एक प्रमुख सैन्य ठिकाना है और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

तालिबान का कहना है कि उन्होंने यह दिखा दिया है कि वे पाकिस्तान की राजधानी के करीब तक पहुंच सकते हैं। हालांकि पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज किया है और कहा है कि उसकी वायु सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के हालिया हमलों में काबुल और कंधार भी निशाने पर रहे। इसके बाद तालिबान ने संकेत दिया कि यदि पाकिस्तान हवाई हमले रोके तो बातचीत की संभावना बन सकती है। लेकिन मौजूदा हालात में Pakistan Taliban War का शांतिपूर्ण समाधान दूर नजर आता है।

पृष्ठभूमि में TTP और सीमा विवाद

Pakistan Taliban War की जड़ें नई नहीं हैं। 1,600 मील लंबी ड्यूरंड लाइन को लेकर दोनों देशों के बीच दशकों से मतभेद रहे हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल TTP के लड़ाके पाकिस्तान के खिलाफ कर रहे हैं।

अफगान तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। मार्च 2024 और मार्च 2025 में भी दोनों पक्षों के बीच झड़पें हुई थीं। उस समय भी हवाई हमले और सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं सामने आई थीं।

अब जब Pakistan Taliban War खुलकर सामने आ चुका है, तो यह केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं रहा। इसमें क्षेत्रीय राजनीति और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे भी जुड़ गए हैं।

भारत की सख्त चेतावनी 

Pakistan Taliban War के बीच भारत की प्रतिक्रिया भी चर्चा में है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पाकिस्तान ने शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बंद नहीं कीं तो भारत इस बार संयम नहीं बरतेगा।

उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि भारत पहले भी आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई कर चुका है और जरूरत पड़ने पर फिर करेगा। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले ही Afghanistan के साथ Pakistan Taliban War में उलझा हुआ है।

भारत ने पाकिस्तान के अफगानिस्तान पर हमलों की निंदा की है। विश्लेषकों का मानना है कि Pakistan Taliban War से पाकिस्तान की सैन्य और आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ेगा, जिसका असर क्षेत्रीय समीकरणों पर भी पड़ेगा।

पाकिस्तान के लिए कई मोर्चे

इस समय पाकिस्तान कई चुनौतियों से जूझ रहा है। आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सीमा पर बढ़ता तनाव उसके लिए चिंता का कारण है। अब Pakistan Taliban War ने एक और मोर्चा खोल दिया है।

अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो पाकिस्तान की संसाधन क्षमता पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, तालिबान के लिए यह अवसर है कि वह अपनी ताकत का प्रदर्शन करे। हालांकि इससे ISIS-K और TTP जैसे संगठनों को भी बढ़ावा मिलने का खतरा है।

वैश्विक प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ सहयोग की बात कही है, लेकिन उसका मुख्य ध्यान फिलहाल अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बताया जा रहा है।

चीन, जो पाकिस्तान का करीबी सहयोगी माना जाता है, फिलहाल खुलकर कोई बयान नहीं दे रहा। ऐसे में Pakistan Taliban War का असर केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव मध्य एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

आगे क्या?

Pakistan Taliban War किस दिशा में जाएगा, यह कहना फिलहाल मुश्किल है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और सैन्य गतिविधियां जारी हैं। तालिबान का नूर खान एयरबेस पर ड्रोन हमले का दावा पाकिस्तान के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव बना सकता है।

भारत की सख्त चेतावनी ने भी संकेत दे दिया है कि क्षेत्रीय समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। यदि स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो Pakistan Taliban War एक बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है।

फिलहाल दुनिया की नजरें इस टकराव पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह संघर्ष सीमित रहेगा या व्यापक युद्ध का रूप लेगा।

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