विज्ञापन जगत के दिग्गज Piyush Pandey का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वह 70 साल के थे। Piyush Pandey ने भारतीय विज्ञापनों को एक नया रंग दिया, जो आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं। Fevicol से लेकर Vodafone तक, उनके बनाए कई विज्ञापन घर-घर पहुंचे। लेकिन Piyush Pandey का असली कमाल था आम भारतीय की जिंदगी को विज्ञापनों में उतारना।
Piyush Pandey ने 1982 में Ogilvy & Mather India (अब Ogilvy India) से अपना सफर शुरू किया था। शुरुआत एक ट्रेनी अकाउंट एग्जीक्यूटिव के रूप में हुई, लेकिन जल्द ही वह क्रिएटिव साइड पर चले गए। उस दौर में विज्ञापन ज्यादातर प्रिंट एड्स के थे, टेलीविजन अभी नया-नया आ रहा था। Piyush Pandey और उनकी टीम ने Ogilvy में कई टीवी कमर्शियल्स बनाए, जो भारतीय स्वाद और आसान-सी लाइन्स से भरे थे।
Piyush Pandey ने कैसे बदला विज्ञापन का चेहरा
Piyush Pandey का योगदान सिर्फ कमर्शियल्स तक सीमित नहीं था। उन्होंने विज्ञापनों को जिंदगी से जोड़ दिया। Asian Paints का “हर खुशी में रंग लाए” हो या Cadbury का “कुछ खास है”, ये विज्ञापन आज भी याद आते हैं। Fevicol का आइकॉनिक “एग” फिल्म तो ऐसा था कि लोग चिपकाने की बात ही सोचने लगे। Piyush Pandey ने Vodafone के लिए भी कई यादगार कैंपेन बनाए, जो सिम्पल लेकिन असरदार थे।
2014 के लोकसभा चुनाव में Piyush Pandey ने मोदी कैंपेन के लिए काम किया। “अब की बार मोदी सरकार” स्लोगन ने वोटर्स के दिलों को छुआ। कई लोग मानते हैं कि इसी कैंपेन ने NDA की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। Piyush Pandey ने राजनीतिक विज्ञापनों को भी आम बोलचाल की भाषा दी। 2015 में उनकी किताब “Pandeymonium” आई, जिसमें उन्होंने अपने सफर और आने वाले रास्ते के बारे में लिखा।
Piyush Pandey को 2004 में Cannes Lions International Festival of Creativity के जूरी प्रेसिडेंट के रूप में चुना गया, वह पहले एशियन थे इस पद पर। 2012 में उन्हें CLIO Lifetime Achievement Award मिला। सबसे बड़ा सम्मान Padma Shri था, जो भारतीय विज्ञापन जगत का पहला ऐसा पुरस्कार था। Piyush Pandey ने न सिर्फ ब्रांड्स को बेचा, बल्कि यादें बनाईं।
Piyush Pandey को श्रद्धांजलि: दोस्तों और नेताओं के शब्द
Piyush Pandey के निधन पर पूरे विज्ञापन जगत में शोक की लहर है। सुहेल सेठ ने लिखा, “बहुत दुख हुआ मेरे सबसे करीबी दोस्त Piyush Pandey के जाने पर। भारत ने सिर्फ एक महान विज्ञापन दिमाग नहीं खोया, बल्कि एक सच्चा देशभक्त और सज्जन व्यक्ति खोया। अब स्वर्ग में ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ पर नाच होगा।”
फिल्ममेकर हंसल मेहता ने विज्ञापन स्टाइल में श्रद्धांजलि दी। “Fevicol का जोड़ टूट गया। एड वर्ल्ड ने आज अपना गोंद खो दिया। जाओ खुश रहो Piyush Pandey।” वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने X पर पोस्ट किया, “श्री Piyush Pandey के निधन पर दुख हुआ। भारतीय विज्ञापन के टाइटन, उन्होंने आम बोलचाल, देसी ह्यूमर और सच्ची गर्मजोशी से कम्युनिकेशन बदल दिया। उनसे कई बार मिलने का मौका मिला।”
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी शोक जताया। “पद्म श्री Piyush Pandey के निधन पर शब्दों से दुख बयां नहीं कर सकता। विज्ञापन जगत का फिनॉमिना, उनकी क्रिएटिविटी ने स्टोरीटेलिंग को नया रूप दिया। मेरे लिए वह दोस्त थे, जिनकी सच्चाई, गर्मजोशी और हास्य हमेशा याद रहेगा। परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों को गहरी संवेदना। ओम शांति।”
Piyush Pandey और वो कैडबरी गर्ल: एक यादगार कहानी
Piyush Pandey ने सिर्फ विज्ञापन नहीं बनाए, यादें बनाईं। 1994 का Cadbury Dairy Milk विज्ञापन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। एक युवती नीले प्रिंटेड ड्रेस में क्रिकेट फील्ड पर नाच रही है, क्योंकि उसका पसंदीदा खिलाड़ी जीत गया। सिक्योरिटी गार्ड रोकते हैं, लेकिन वह खुशी से घूमती रहती है, चॉकलेट हाथ में लिए। भीड़ चीयर करती है, म्यूजिक बजता है, और स्क्रीन पर आता है: “असली स्वाद जिंदगी का।”
ये विज्ञापन सिर्फ कमर्शियल नहीं था, एक कल्चरल मोमेंट था। Piyush Pandey के इंस्टिंक्ट ने इसे जन्म दिया। उस वक्त Cadbury को इमेज प्रॉब्लम थी—बच्चों का ट्रीट लगता था, बड़ों के लिए नहीं। Ogilvy को ब्रीफ मिला: चॉकलेट को कूल बनाओ, वरना अकाउंट चला जाएगा।
Piyush Pandey अमेरिका में दिवाली वेकेशन पर थे। बॉस का कॉल आया, वह फौरन भारत लौटे। अटलांटिक के ऊपर उड़ान में, बोर्डिंग पास के पीछे उन्होंने लिरिक्स लिखे: “हर किसी में कुछ ऐसा है… जो बहुत सच्चा है… पूछ लो किसी से।” घर पहुंचे तो दोस्त लुईस बैंक्स से म्यूजिक बनवाया, जो 15 मिनट में तैयार हो गया। इंग्लिश वर्शन गैरी लॉयर ने गाया, हिंदी में शंकर महादेवन ने। महादेवन की “कुछ स्वाद है” वाली हरकत ने जादू जोड़ा।
अब चेहरा चाहिए था—खुशी का प्रतीक। Piyush Pandey को ग्लैमरस मॉडल नहीं, रियल जॉय चाहिए था। शिमोना राशी आईं। वह प्रोफेशनल डांसर नहीं थीं, बस नेचुरल मूवमेंट वाली। डायरेक्टर महेश मथाई ने ब्राबोर्न स्टेडियम में शूट किया। शिमोना का सीन एक टेक में हो गया—कोई रिहर्सल नहीं, बस चॉकलेट और म्यूजिक। “उसकी मूवमेंट देखकर पता चला, ये परफेक्ट है,” Ogilvy टीम मेंबर ने बाद में कहा। “ये परफॉर्म नहीं लग रही, फील हो रही।”
Piyush Pandey का कमाल: चॉकलेट और खुशी का मेल
विज्ञापन टीवी पर आया और फट से हिट हो गया। क्रिकेट मैच और न्यूज के बीच देखने वाली जनरेशन के लिए कैडबरी गर्ल खुशी की मिसाल बनी। प्रकाश नायर, Ogilvy के एसोसिएट प्रेसिडेंट ने द प्रिंट को बताया, “इससे पहले कैडबरी पैरेंट्स से बच्चों को गिफ्ट लगती थी। ग्रोथ के लिए जरूरी था इसे सबके लिए बनाना। ये कैंपेन ने चॉकलेट को हर उम्र का बना दिया।”
विज्ञापन ने हर बड़ा अवॉर्ड जीता, Advertising Club Bombay के Abby Awards में “Campaign of the Century” बना। लेकिन असली जीत कल्चरल थी—चॉकलेट को जॉय से जोड़ दिया। 2020 में Ogilvy ने जेंडर-स्वैप्ड वर्शन बनाया, जहां लड़का फील्ड पर दौड़ता है। आईडिया स्वगता बनर्जी और सम्यू मुरली का था, लेकिन Piyush Pandey की शर्त थी: “सब कुछ वैसा ही, लेकिन म्यूजिक मत बदलना।”
Piyush Pandey का यही कमाल था। उन्होंने विज्ञापनों को एल्गोरिदम और हैशटैग के दौर से पहले वायरल बना दिया। बोर्डिंग पास पर लिखी धुन और अनट्रेंड डांसर की रिदम आज भी दिल छूती है। Piyush Pandey ने विज्ञापन नहीं, यादें बनाईं—और आम लम्हों को “कुछ खास” बना दिया।