आज 6 जनवरी 2026 को देशभर में Sakat Chauth 2026 का व्रत रखा जा रहा है। सुबह से ही लाखों महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति की कामना के साथ यह उपवास कर रही हैं। खासकर जो महिलाएं पहली बार Sakat Chauth 2026 का व्रत कर रही हैं, उनके मन में कई सवाल होते हैं—चांद कब निकलेगा, पूजा किस समय करनी है और व्रत खोलने का सही तरीका क्या है। इसी वजह से आज यह व्रत चर्चा में बना हुआ है।
Sakat Chauth को तिलकुट चौथ या संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश और माता सकट को समर्पित माना जाता है और इसे संतान रक्षा से जोड़कर देखा जाता है।
Sakat Chauth 2026 की तारीख और चंद्रोदय का समय
पंचांग के अनुसार, Sakat Chauth 2026 की चतुर्थी तिथि आज सुबह लगभग 8 बजे शुरू हो चुकी है और यह कल सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। ऐसे में व्रत का मुख्य दिन आज ही माना जा रहा है। चंद्रोदय का समय आज शाम करीब 8:54 बजे से 9:23 बजे के बीच बताया गया है। परंपरा के अनुसार Sakat Chauth का व्रत चांद देखने और अर्घ्य देने के बाद ही खोला जाता है। दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में मौसम साफ है, इसलिए चांद दिखाई देने की संभावना अच्छी मानी जा रही है।
बीते कुछ दिनों से Sakat Chauth 2026 की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति भी रही। कुछ पंचांगों में 5 जनवरी तो कुछ में 7 जनवरी का उल्लेख था, लेकिन ज्यादातर ज्योतिषाचार्यों और उज्जैन के पंडितों के अनुसार आज 6 जनवरी ही Sakat Chauth 2026 का मुख्य दिन है।
Sakat Chauth 2026 से पहले कैसी हो तैयारी
Sakat Chauth 2026 का व्रत आमतौर पर निरजला रखा जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें, पीले या लाल रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं। घर की सफाई के बाद पूजा की तैयारी करें। पूजा सामग्री में गणेश जी की मूर्ति या फोटो, माता सकट का चित्र, कलश, जल, रोली, चंदन, हल्दी, कुमकुम, दूर्वा, फूल, 21 सुपारी, 21 भुने चने, तिलकुट या मोदक, दूध और दीपक शामिल करें।
पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर सबसे पहले कलश स्थापित करें। इसके बाद गणेश जी और माता सकट को विराजमान करें। मान्यता है कि Sakat Chauth में गोधूलि बेला यानी शाम करीब 5:30 से 6:30 बजे के बीच पूजा करना शुभ रहता है।
Sakat Chauth 2026 की पूजा विधि, आसान शब्दों में
Sakat Chauth 2026 की पूजा विधि सरल है, लेकिन इसमें श्रद्धा सबसे अहम मानी जाती है। सबसे पहले गणेश जी को जल से स्नान कराएं और चंदन-रोली का तिलक लगाएं। दूर्वा और फूल अर्पित करें। इसके बाद 21 सुपारी और 21 भुने चने हाथ में लेकर संकल्प लें कि आप Sakat Chauth का व्रत संतान की रक्षा और परिवार की भलाई के लिए कर रही हैं।
घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं और तिलकुट या मोदक का भोग लगाएं। “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और फिर सकट चतुर्थी व्रत कथा सुनें। कथा के बाद आरती करें और चांद निकलने की प्रतीक्षा करें।
चंद्रोदय के बाद कैसे खोलें Sakat Chauth 2026 का व्रत
Sakat Chauth 2026 में चांद निकलने के बाद दूध में तिल, अक्षत और फूल डालकर अर्घ्य दिया जाता है। चंद्रमा की तीन परिक्रमा करने की परंपरा भी है। इसके बाद ही व्रत खोला जाता है। पहले तिलकुट या तिल से बनी चीज खाई जाती है, फिर दूध और शकरकंद लिया जाता है। कुछ घरों में साबूदाना खिचड़ी या फलाहार भी किया जाता है।
परंपरागत रूप से यह व्रत महिलाओं से जुड़ा माना जाता है, लेकिन कई जगह पुरुष भी Sakat Chauth 2026 का व्रत रखते हैं।
Sakat Chauth 2026 का महत्व और मान्यताएं
मान्यता है कि Sakat Chauth 2026 का व्रत रखने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उनकी आयु बढ़ती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए उनकी पूजा से जीवन की बाधाएं कम होती हैं। खास तौर पर माघ मास की सकट चतुर्थी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई महिलाओं का अनुभव है कि Sakat Chauth 2026 का व्रत रखने से बच्चों की सेहत और पढ़ाई में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। यही कारण है कि आज के समय में भी यह व्रत पूरी आस्था के साथ किया जाता है।
व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं
Sakat Chauth 2026 में निरजला व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर बिना पानी रहती हैं, जबकि कुछ फलाहार का विकल्प चुनती हैं। फल, दूध या नारियल पानी लिया जा सकता है। व्रत खोलते समय तिलकुट जरूर खाएं। नमक का सेवन सीमित रखें और मांसाहार व शराब से पूरी तरह दूर रहें।
अगले दिन उद्यापन कर जरूरतमंदों को तिल, गुड़ या काले चने का दान करना शुभ माना जाता है।
Sakat Chauth 2026 का व्रत आस्था, धैर्य और विश्वास का प्रतीक है। चांद का इंतजार करते हुए परिवार के साथ समय बिताना भी इस दिन की खास बात मानी जाती है। जो महिलाएं यह व्रत रख रही हैं, उनके समर्पण को सम्मान दिया जाता है। Sakat Chauth 2026 पर यही कामना की जाती है कि हर घर में सुख-शांति बनी रहे और संतान हमेशा सुरक्षित रहे।