दिल्ली में सोमवार सुबह सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक चौंकाने वाली घटना हुई। अदालत के भीतर एक वकील ने Chief Justice of India BR Gavai पर जूता फेंकने की कोशिश की। यह मामला सामने आते ही पूरे देश में हैरानी फैल गई। कुछ ही घंटों बाद, Bar Council of India ने तुरंत कार्रवाई करते हुए Supreme Court lawyer suspended आदेश जारी किया और वकील राकेश किशोर का लाइसेंस रद्द कर दिया।
अब उन्हें देशभर की किसी भी अदालत, ट्रिब्यूनल या कानूनी संस्था में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं है।
⚖️ क्या है पूरा मामला – सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश
सोमवार (6 अक्टूबर 2025) की सुबह लगभग 11:35 बजे सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच में Chief Justice BR Gavai और जस्टिस विनोद चंद्रन सुनवाई कर रहे थे। तभी दिल्ली के मयूर विहार निवासी 71 वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर ने अपनी खेल जूते (स्पोर्ट्स शूज) उतारे और अचानक उन्हें Chief Justice की ओर फेंकने की कोशिश की।
अदालत में मौजूद लोगों के मुताबिक, वह जोर से चिल्लाए — “भारत सनातन धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा!”
सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया और बाहर ले गए।
इस पूरी घटना के बाद भी Chief Justice Gavai ने बेहद शांत रहते हुए कहा —
“इन बातों से हमें फर्क नहीं पड़ता। चलिए, सुनवाई जारी रखिए।”
उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर काफी सराही जा रही है।
🚨 Supreme Court Lawyer Suspended: बार काउंसिल ने लिया कड़ा एक्शन
घटना के कुछ ही घंटों बाद Bar Council of India (BCI) ने अधिवक्ता राकेश किशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आदेश में कहा गया कि Supreme Court lawyer suspended होने के बाद वह किसी भी कोर्ट, ट्रिब्यूनल या अथॉरिटी में अब न तो पेश हो सकते हैं, न बहस कर सकते हैं और न ही वकालत कर सकते हैं।
बार काउंसिल ने कहा कि यह निर्णय “कानून की गरिमा बनाए रखने” के लिए लिया गया है। साथ ही, एक शो कॉज नोटिस भी जारी किया गया है जिसमें किशोर से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है कि क्यों न यह निलंबन जारी रखा जाए और आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
दिल्ली बार काउंसिल को आदेश दिया गया है कि वह बिना देर किए इस निलंबन को लागू करे और अदालतों व ट्रिब्यूनलों को इसकी जानकारी दे।
🔍 क्या था वकील का मकसद?
सीनियर वकीलों के मुताबिक, Supreme Court lawyer suspended राकेश किशोर शायद कुछ हफ्ते पहले CJI के एक बयान से नाराज़ थे।
सितंबर में मध्य प्रदेश के जबरी मंदिर में विष्णु मूर्ति की बहाली को लेकर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की थी —
“यह मामला केवल पब्लिसिटी के लिए लाया गया है। आप कहते हैं कि आप भगवान विष्णु के भक्त हैं, तो जाइए और प्रार्थना कीजिए।”
इस बयान के बाद कुछ धार्मिक समूहों में नाराज़गी देखी गई थी। माना जा रहा है कि उसी संदर्भ में किशोर ने यह हरकत की।
🧾 कोर्ट के अंदर क्या हुआ था?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब किशोर ने जूता फेंकने की कोशिश की, तब वह वस्तु जस्टिस विनोद चंद्रन के पास से होकर निकल गई और उन्हें हल्का सा छूकर आगे जा गिरी। बाद में किशोर ने माफ़ी मांगते हुए कहा कि उनका इरादा Chief Justice की ओर था, लेकिन वह गलती से जस्टिस चंद्रन की दिशा में चला गया।
इसके बाद उन्हें कोर्ट परिसर में ही हिरासत में लिया गया और कुछ घंटों बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।
🧑⚖️ सुप्रीम कोर्ट और सरकार की प्रतिक्रिया
Supreme Court lawyer suspended आदेश आने के तुरंत बाद कई बड़े नेताओं और कानूनी हस्तियों ने इस घटना की निंदा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X (Twitter) पर लिखा —
“यह घटना निंदनीय है और हर भारतीय को क्रोधित करने वाली है। समाज में ऐसी हरकतों की कोई जगह नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने Chief Justice Gavai से बात की और उनकी शांति एवं संयम की सराहना की।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे “सोशल मीडिया की भ्रामक सूचनाओं का नतीजा” बताया और कहा कि CJI की शालीन प्रतिक्रिया को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने इसे “ध्यान खींचने वाला स्टंट” बताया और जनता से जिम्मेदारी भरे संवाद की अपील की।
🗣️ विपक्ष और वरिष्ठ वकीलों ने भी दी प्रतिक्रिया
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा —
“यह कृत्य पूरी तरह असभ्य और अदालत की गरिमा पर हमला है। इसे हर स्तर पर सार्वजनिक रूप से निंदा की जानी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि “प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और कानून मंत्री की चुप्पी चौंकाने वाली है।”
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी कहा —
“चीफ जस्टिस पर हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान की आत्मा पर हमला है।”
वहीं, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बयान जारी कर कहा —
“यह घटना सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संविधान पर सीधा आघात है।”
🔒 सुरक्षा बढ़ाई गई, सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा बैठक
घटना के बाद Chief Justice Gavai ने लंच ब्रेक के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सचिव जनरल और सुरक्षा प्रमुखों के साथ बैठक की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने पर चर्चा की गई ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
📰 अदालत की गरिमा पर सवाल और सबक
यह घटना देश की सर्वोच्च अदालत में घटी, इसलिए इसका असर सिर्फ एक दिन की खबर नहीं बल्कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर पड़ा है।
Supreme Court lawyer suspended होने के बाद अब बार काउंसिल की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें हैं।
इस मामले ने यह भी दिखाया कि अदालत की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा — चाहे वह कोई भी हो।