30 जनवरी की रात वैश्विक वित्तीय बाजारों में जो कुछ हुआ, उसने निवेशकों को पूरी तरह चौंका दिया। Gold और Silver जैसे सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स अचानक भारी बिकवाली की चपेट में आ गए। कुछ ही समय में कीमतें इस कदर गिरीं कि पूरी दुनिया में Gold Silver Market Crash की चर्चा होने लगी। इस गिरावट के पीछे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और US Federal Reserve से जुड़ा एक बड़ा फैसला बताया जा रहा है।
मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक, Trump और Federal Reserve के बीच लंबे समय से चल रही ब्याज दरों की खींचतान ने इस Gold Silver Market Crash को ट्रिगर किया। कुछ ही मिनटों में कीमती धातुओं के बाजार से ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू साफ हो गई और निवेशक समझ ही नहीं पाए कि आखिर हालात इतनी तेजी से कैसे बदल गए।
रातों-रात क्यों हुआ Gold Silver Market Crash
30 जनवरी की रात Silver की कीमतों में करीब 12 फीसदी तक की तेज गिरावट दर्ज की गई। भारत में Silver फिसलकर लगभग 67,000 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गई और करीब 3.51 लाख रुपये के आसपास बंद हुई।
Gold की बात करें तो यहां भी हालात बेहतर नहीं थे। Gold के दाम में करीब 15,000 रुपये तक की गिरावट देखी गई और कीमत 1.54 लाख रुपये के स्तर तक आ गई। बाद में हल्की रिकवरी के साथ Gold करीब 1.64 लाख रुपये पर ट्रेड करता दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Gold एक दिन में 6 से 9 फीसदी तक टूटा, जबकि Silver में करीब 15 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। यही वजह है कि इसे हाल के वर्षों का बड़ा Gold Silver Market Crash माना जा रहा है।
कितनी Market Value हुई साफ
Analysts का अनुमान है कि इस तेज गिरावट से कीमती धातुओं के बाजार से 2 से 3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की Market Value कुछ ही मिनटों में खत्म हो गई। सोशल मीडिया और मार्केट रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ Gold Market Cap में ही करीब 8 से 9 फीसदी की गिरावट आई, जिससे लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू मिट गई।
अगर Gold, Silver और Stock Market को मिलाकर देखा जाए, तो करीब 6 ट्रिलियन डॉलर तक की वैल्यू सिर्फ 60 मिनट के भीतर साफ हो गई। यह आंकड़ा बताता है कि Gold Silver Market Crash कितना गहरा और अचानक था।
Trump और Federal Reserve की पुरानी टकराहट
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में Donald Trump और US Federal Reserve के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान है। जैसे भारत में RBI ब्याज दरों और रुपये की स्थिति को नियंत्रित करता है, वैसे ही अमेरिका में Federal Reserve डॉलर और मौद्रिक नीति को संभालता है।
दुनिया के करीब 60 से 65 फीसदी Global Transactions डॉलर में होते हैं, इसलिए Fed की नीतियों का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहता। Trump चाहते थे कि ब्याज दरें कम रखी जाएं, ताकि अमेरिकी जनता को सस्ता कर्ज मिले, खर्च बढ़े और टैरिफ की वजह से बढ़ी महंगाई का असर कम हो।
Jerome Powell से क्यों नाराज हुए Trump
Fed Chair Jerome Powell इस सोच से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि ब्याज दरों का फैसला सिर्फ राष्ट्रपति की इच्छा से नहीं, बल्कि Inflation, Dollar की मजबूती और Global Economy को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब Federal Reserve ने अपनी पॉलिसी मीटिंग में ब्याज दर 3.75 फीसदी पर ही बरकरार रखने का फैसला किया और किसी तरह की कटौती नहीं की। यही वह फैसला था, जिसे अंकित अवस्थी ने Gold Silver Market Crash का ट्रिगर बताया है।
एक फैसले ने कैसे बदला Market Sentiment
ब्याज दरों में कटौती न होने से Trump नाराज हो गए और खबरें फैलने लगीं कि वे Jerome Powell को हटाकर नए Fed Chair की घोषणा कर सकते हैं। इस खबर ने बाजार में Federal Reserve की स्वतंत्रता को लेकर चिंता बढ़ा दी।
Trump ने सार्वजनिक रूप से संकेत दे दिए कि Powell का समय खत्म हो चुका है। इसके कुछ ही घंटों बाद Gold, Silver, Bitcoin और अन्य Risk Assets में तेज बिकवाली शुरू हो गई। चार्ट्स पर लंबी Red Candles दिखने लगीं और Gold Silver Market Crash सुर्खियों में आ गया।
Market ने उलटी दिशा में क्यों दिया Reaction
अंकित अवस्थी बताते हैं कि यह गिरावट एक तरह से Market की “गलत दिशा में Reaction” थी। आमतौर पर जब Central Bank की स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं और राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ता है, तो Dollar पर भरोसा कम होता है और Gold-Silver जैसे Safe Assets में निवेश बढ़ना चाहिए।
लेकिन इस बार अचानक फैली अनिश्चितता और डर ने निवेशकों को Panic Mode में डाल दिया। भारी मात्रा में Profit Booking शुरू हुई, Orders Trigger हुए और कुछ ही मिनटों में Gold Silver Market Crash और गहराता चला गया।
Kevin Warsh का नाम और नया संकेत
वीडियो में यह भी बताया गया कि बाजार में यह खबर फैल गई कि Trump Fed के नए Chair के तौर पर Kevin Warsh को नियुक्त कर सकते हैं। Trump ने सार्वजनिक रूप से Kevin Warsh की तारीफ भी की है।
Kevin Warsh को अपेक्षाकृत Low Interest Rates और Crypto-Friendly रुख के समर्थक के रूप में देखा जाता है। इससे यह संकेत गया कि आगे चलकर Dollar कमजोर हो सकता है। हालांकि Short Term में इसका असर Gold Silver Market Crash के रूप में दिखाई दिया।
Partial Recovery ने क्या बताया
Session के अंत तक Gold और Silver में हल्की Recovery जरूर देखने को मिली, लेकिन इतनी नहीं कि पूरी गिरावट की भरपाई हो सके। अवस्थी के मुताबिक यह Recovery इस बात का संकेत है कि शुरुआती Panic Selling के बाद कुछ बड़े Investors ने निचले स्तरों पर खरीदारी भी की।
यह आने वाले दिनों की Market Direction के लिए अहम संकेत हो सकता है, लेकिन फिलहाल बाजार अभी भी Uncertainty Mode में बना हुआ है।
Investors के लिए क्या है सीख
अंकित अवस्थी निवेशकों को सलाह देते हैं कि ऐसे Gold Silver Market Crash के समय Panic में आकर फैसले न लें। Gold और Silver जैसे Assets में निवेश हमेशा Long Term नजरिए से करना चाहिए।
भारतीय निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी Financial Capacity के मुताबिक ही निवेश करें, ज्यादा Leverage या उधार के पैसे से Trading से बचें और Global Headlines देखकर Emotional Decisions न लें।
आखिरकार, Trump और Federal Reserve से जुड़ा यह घटनाक्रम सिर्फ अमेरिकी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। इसने दिखा दिया कि Policy से जुड़ी Uncertainty कुछ ही घंटों में Gold Silver Market Crash जैसा बड़ा झटका दे सकती है, और बाजार किसी भी समय, किसी भी दिशा में जा सकता है।