WhatsApp Strict Account Settings को लेकर टेक यूज़र्स के बीच चर्चा तेज हो गई है। WhatsApp ने एक नया सुरक्षा फीचर लॉन्च किया है, जिसका मकसद यूज़र्स को स्कैम, हैकिंग और डिजिटल जासूसी जैसे बढ़ते खतरों से बचाना है। इस नए फीचर का नाम WhatsApp Strict Account Settings रखा गया है और इसे एक तरह के वन-टैप सिक्योरिटी मोड के तौर पर पेश किया गया है।
आज के समय में WhatsApp सिर्फ मैसेज भेजने का ऐप नहीं रह गया है। यह निजी बातचीत, काम से जुड़े मैसेज, डॉक्यूमेंट शेयरिंग और यहां तक कि कॉलिंग का भी अहम जरिया बन चुका है। ऐसे में WhatsApp Strict Account Settings जैसे फीचर को कंपनी की सुरक्षा रणनीति में एक अहम कदम माना जा रहा है।
WhatsApp Strict Account Settings क्या है
WhatsApp Strict Account Settings एक नया सिक्योरिटी मोड है, जिसे यूज़र सिर्फ एक टैप में ऑन कर सकेंगे। कंपनी के मुताबिक, यह फीचर सेटिंग्स में एक अलग ऑप्शन के तौर पर दिखेगा। जैसे ही यूज़र WhatsApp Strict Account Settings को एक्टिव करता है, अकाउंट एक एडवांस सिक्योरिटी लेवल में चला जाता है।
इस मोड के ऑन होते ही WhatsApp अपने-आप कई हाई-लेवल सिक्योरिटी लेयर को सक्रिय कर देता है। इन लेयर्स का मकसद संदिग्ध लिंक, अनजान मीडिया फाइल्स और जोखिम भरे कॉल्स को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है।
कैसे काम करेगा WhatsApp Strict Account Settings
WhatsApp Strict Account Settings को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यूज़र को अलग-अलग सेटिंग्स बदलने की जरूरत न पड़े। आमतौर पर सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए कई विकल्प मैन्युअली ऑन करने पड़ते हैं, लेकिन यहां एक ही टैप में पूरा सिस्टम एक्टिव हो जाएगा।
इस फीचर के एक्टिव होते ही WhatsApp संदिग्ध और जोखिम भरे कंटेंट पर सख्त फिल्टर लगा देगा। कंपनी का कहना है कि WhatsApp Strict Account Settings स्कैम, मालवेयर, स्पाइवेयर और सर्विलांस अटैक्स को रोकने में मदद करेगा।
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Strict Account Settings ऑन करने पर क्या बदलेगा
WhatsApp Strict Account Settings को एक्टिव करने के बाद यूज़र्स को कुछ साफ बदलाव देखने को मिलेंगे। सबसे बड़ा बदलाव अनजान नंबरों से आने वाले मीडिया कंटेंट को लेकर होगा।
इस मोड के ऑन होते ही अनजान नंबरों से भेजी गई फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट अपने-आप ब्लॉक हो जाएंगे। इसका मतलब यह है कि ऐसी फाइलें न तो ऑटो-डाउनलोड होंगी और न ही सीधे ओपन की जा सकेंगी।
इसके अलावा, चैट में आने वाले लिंक का प्रीव्यू भी डिसेबल हो जाएगा। इससे फिशिंग वेबसाइट, ट्रैकिंग लिंक या मालवेयर वाले URL के जरिए होने वाले हमलों का खतरा कम हो सकता है।
अनजान कॉल्स पर भी लगेगा ब्रेक
WhatsApp Strict Account Settings का एक अहम हिस्सा कॉल सिक्योरिटी से जुड़ा है। इस मोड को ऑन करने के बाद अनजान कॉन्टैक्ट से आने वाली WhatsApp कॉल्स साइलेंट हो जाएंगी।
इससे यूज़र को बार-बार आने वाली स्पैम कॉल्स से राहत मिलेगी। साथ ही, फर्जी कॉल के जरिए होने वाले सोशल इंजीनियरिंग अटैक का रिस्क भी कम होगा। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि कई बड़े फ्रॉड कॉल के जरिए ही शुरू होते हैं।
साइबर एक्सपर्ट्स इस फीचर को क्यों अहम मान रहे हैं
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातर एडवांस स्पाइवेयर और सर्विलांस अटैक्स की एंट्री अनवेरिफाइड लिंक, मीडिया फाइल्स या अनजान कॉल्स से ही होती है। WhatsApp Strict Account Settings इन तीनों ही एंट्री पॉइंट पर कंट्रोल लगाने की कोशिश करता है।
यही वजह है कि एक्सपर्ट्स इसे एक जरूरी सुरक्षा कदम मान रहे हैं, खासकर उन यूज़र्स के लिए जो नियमित तौर पर अनजान लोगों से बातचीत करते हैं।
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर WhatsApp का क्या कहना है
WhatsApp Strict Account Settings को लेकर कंपनी ने यह भी साफ किया है कि इससे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। WhatsApp के मुताबिक, यूज़र्स की चैट पहले की तरह पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।
कंपनी का कहना है कि वह पिछले करीब एक दशक से Signal प्रोटोकॉल पर आधारित एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल कर रही है। इस तकनीक में मैसेज सिर्फ भेजने और पाने वाले के बीच ही पढ़े जा सकते हैं। यहां तक कि WhatsApp खुद भी इन मैसेज को एक्सेस नहीं कर सकता।
प्राइवेसी को लेकर उठते रहे हैं सवाल
हालांकि, WhatsApp और उसकी पैरेंट कंपनी Meta की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के कुछ यूज़र्स ने अमेरिकी कोर्ट में याचिका दायर की है।
इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि WhatsApp और Meta यूज़र्स की निजी चैट को स्टोर और एनालाइज करती हैं और जरूरत पड़ने पर उन तक पहुंच बना सकती हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सिर्फ एक मार्केटिंग दावा है।
Meta ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए दोहराया है कि यूज़र्स के मैसेज सुरक्षित हैं और कंपनी उन्हें पढ़ नहीं सकती। WhatsApp Strict Account Settings को इसी भरोसे को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
किन यूज़र्स के लिए सबसे जरूरी है यह फीचर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp Strict Account Settings खास तौर पर हाई-रिस्क प्रोफाइल वाले यूज़र्स के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें पत्रकार, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर्स, सामाजिक कार्यकर्ता, ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स और पॉलिटिकल वर्कर्स शामिल हैं।
इसके अलावा, पब्लिक फिगर्स और वे लोग जो संवेदनशील मुद्दों पर काम करते हैं, उनके लिए भी यह फीचर अहम माना जा रहा है।
आम यूज़र्स के लिए क्यों जरूरी है Strict Account Settings
हालांकि WhatsApp Strict Account Settings सिर्फ हाई-प्रोफाइल लोगों तक सीमित नहीं है। आम यूज़र्स के लिए भी यह फीचर काफी काम का हो सकता है।
आजकल KYC फ्रॉड, फेक लॉटरी मैसेज, जॉब ऑफर स्कैम और फर्जी लिंक के जरिए ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर स्कैम अनजान नंबरों और संदिग्ध मीडिया फाइल्स के जरिए ही होते हैं।
ऐसे में अगर WhatsApp Strict Account Settings ऑन हो, तो इन खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है। खासकर बुजुर्ग, कम टेक-सेवी और छोटे शहरों के यूज़र्स के लिए यह फीचर मददगार साबित हो सकता है।
फीचर कब और कैसे मिलेगा
WhatsApp के मुताबिक, WhatsApp Strict Account Settings का रोल-आउट शुरू हो चुका है। आने वाले कुछ हफ्तों में यह फीचर स्टेबल अपडेट के साथ सभी यूज़र्स के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा।
इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले WhatsApp को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करना जरूरी है। इसके लिए Google Play Store या Apple App Store पर जाकर ऐप अपडेट करना होगा।
अगर अभी आपके WhatsApp की सेटिंग्स में Strict Account Settings का ऑप्शन नहीं दिख रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह फीचर बैच-वाइज़ रोल-आउट किया जा रहा है और धीरे-धीरे सभी अकाउंट्स तक पहुंचेगा।
यूज़र्स को क्या करना चाहिए
WhatsApp Strict Account Settings को लेकर मैसेज साफ है कि सिक्योरिटी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। स्कैमर्स लगातार नए तरीके निकाल रहे हैं और ज्यादातर हमले वहीं सफल होते हैं जहां यूज़र सतर्क नहीं रहता।
यूज़र्स के लिए जरूरी है कि वे WhatsApp को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर रखें। जैसे ही WhatsApp Strict Account Settings का ऑप्शन दिखे, उसे एक्टिव करने पर गंभीरता से विचार करें।
साथ ही, अनजान नंबर से आए लिंक, डॉक्यूमेंट और मीडिया फाइल्स पर क्लिक करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है, चाहे सिक्योरिटी फीचर ऑन ही क्यों न हो।
डिजिटल दुनिया में सुरक्षा सिर्फ टेक कंपनियों के फीचर्स से नहीं, बल्कि यूज़र की जागरूकता से भी तय होती है। WhatsApp Strict Account Settings एक मजबूत सुरक्षा दीवार जरूर बना सकता है, लेकिन दरवाजा खोलना या बंद रखना आखिरकार यूज़र के हाथ में ही है।