Delhi Blast की जांच के बीच जम्मू और श्रीनगर में काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने बड़ी कार्रवाई की है। सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसियों को जम्मू-कश्मीर की जेलों के अंदर एक सक्रिय पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क की जानकारी मिली थी, जो Delhi Blast की प्लानिंग से जुड़ा हो सकता है। इसी वजह से कोट बलवाल जैसी हाई सिक्योरिटी जेलों में अचानक रेड की गई। कई कैदियों और संदिग्धों पर शक है कि उनका संपर्क पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलरों से बना हुआ था। Delhi Blast के बाद एजेंसियों ने इस जांच को बेहद गंभीरता से आगे बढ़ाया है।
जेलों में आतंकी नेटवर्क कैसे सक्रिय हुआ?
Delhi Blast की जांच में यह बात सामने आई है कि कई बार इन जेलों में फोन और दूसरे संचार उपकरण मिलने की सूचनाएं आती रही हैं। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियां अब यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि कहीं जेलों के अंदर बैठे लोग आतंकी मॉड्यूल के लिए सक्रिय भूमिका तो नहीं निभा रहे। Delhi Blast ने एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट कर दिया है और इसी कारण छापेमारी का दायरा बढ़ा दिया गया है।
Delhi Blast केस में डॉक्टरों का मॉड्यूल कैसे सामने आया?
Delhi Blast की जांच का सबसे हैरान करने वाला पहलू डॉक्टरों से जुड़ा आतंकी मॉड्यूल है। 2023 में श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में मौलवी इरफान अहमद की मुलाकात डॉक्टर मुजमिल और डॉक्टर उमर से हुई। यह मुलाकात दो साल तक जारी संपर्क की शुरुआत थी। दो साल तक मौलवी इरफान ने फोन पर इन डॉक्टरों को प्रभावित किया और कट्टरपंथ की तरफ धकेला। Delhi Blast की प्लानिंग से जुड़े कई संकेत इन्हीं बातचीतों से जुड़े माने जा रहे हैं।
जैश से संपर्क और राइफल मिलने का बड़ा खुलासा
जांच में सामने आया कि मौलवी ने डॉक्टरों की मुलाकात जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से कराई थी। Delhi Blast केस से जुड़ी दो राइफलें भी इसी मॉड्यूल की तरफ इशारा करती हैं। एक राइफल शाहीन की कार से और दूसरी आदिल के लॉकर से बरामद हुई। यह साफ दिखाता है कि Delhi Blast किसी संगठित नेटवर्क के जरिए अंजाम देने की कोशिश की गई थी।
पोस्टर मामले से खुला Delhi Blast मॉड्यूल का पहला छोर
Delhi Blast की जांच तब और तेज हुई जब नागाम क्षेत्र में जैश समर्थक पोस्टर लगे। सीसीटीवी फुटेज से चार ओवरग्राउंड वर्कर सामने आए। उनकी गिरफ्तारी के बाद मौलवी इरफान का नाम सामने आया और फिर डॉक्टर अलीम, डॉक्टर मुजमिल, डॉक्टर उमर और डॉक्टर मुजफ्फर की कड़ियां खुलीं। जांच टीम के अनुसार यह पूरा मॉड्यूल लंबे समय से सक्रिय था और Delhi Blast इसी नेटवर्क का परिणाम हो सकता है।
शाहीन की भूमिका: पाकिस्तानी सेना से संपर्क और सीक्रेट ऐप्स का इस्तेमाल
Delhi Blast की जांच में एक और बड़ा नाम सामने आया—शाहीन। सूत्रों के मुताबिक शाहीन पाकिस्तानी सेना के संपर्क में थी और एक खास ऐप के जरिए बातचीत करती थी। उसके फोन से मिली चैट्स में पता चला कि वह अपने साथियों से कोडवर्ड में बात करती थी ताकि Delhi Blast जैसी गतिविधियों का कोई सुराग न मिले। शाहीन LinkedIn पर भी सक्रिय थी, जहां उसकी प्रोफाइल बिल्कुल सामान्य दिखती थी। उसके संपर्क में पाकिस्तान, यूएई और कजाकिस्तान के कई लोग शामिल थे।
‘डॉक्टर सेमिनार’ की आड़ में रखी जाने वाली सीक्रेट मीटिंग
Delhi Blast मॉड्यूल से जुड़ा सबसे दिलचस्प खुलासा एक सीक्रेट बैठक का है। शाहीन लखनऊ या कानपुर में एक मीटिंग आयोजित करना चाहती थी, जिसमें Delhi Blast से जुड़े डॉक्टरों को शामिल होना था। बैठक का जिम्मा शाहीन ने अपने भाई परवेज को दिया। उसने कई होटलों की रेकी भी की। इस मीटिंग को “डॉक्टर सेमिनार” का नाम दिया जाना था ताकि कोई शक न हो। Delhi Blast मॉड्यूल की अगली प्लानिंग इसी मीटिंग में तय की जानी थी। हालांकि आदिल की शादी की वजह से इसे टालना पड़ा।
Delhi Blast जांच अब कई राज्यों तक फैली
Delhi Blast की परतें खुलते-खुलते अब जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश तक फैल चुकी हैं। मौलवी, डॉक्टर, ओवरग्राउंड वर्कर्स, शाहीन और पाकिस्तानी संपर्क—इन सभी की कड़ियां अब Delhi Blast के केंद्र पर आकर जुड़ रही हैं। जांच एजेंसियां दावा कर रही हैं कि Delhi Blast का पूरा नेटवर्क जल्द ही सामने लाया जाएगा।
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