लाल किला ब्लास्ट से जुड़े आतंकी अदिल का सहारनपुर ठिकाना कैसे बना? अस्पताल डायरेक्टर का बड़ा खुलासा | Lal Kila Blast Case

अदिल को अस्पताल में कैसे मिली नौकरी?

सहारनपुर के एक फेमस अस्पताल का नाम इन दिनों चर्चा में है, और वजह है Lal Kila Blast Case से जुड़ा डॉक्टर अदिल। अस्पताल के डायरेक्टर मनोज बताते हैं कि जनवरी-फरवरी में अस्पताल में मेडिसिन कंसल्टेंट की पोस्ट खाली थी। सर्जन डॉक्टर अंकुर चौधरी ने अदिल का नाम सुझाया क्योंकि दोनों पहले दिल्ली रोड स्थित वीब्रोज़ अस्पताल में साथ काम कर चुके थे। बातचीत केवल सैलरी पर हुई और अदिल की योग्यता देखते हुए उसे नौकरी दे दी गई। उस समय किसी को अंदाज़ा नहीं था कि वही व्यक्ति आगे जाकर Lal Kila Blast Case का अहम चेहरा बनेगा।

डॉक्टर अदिल का व्यवहार और काम करने का तरीका

डॉक्टर मनोज बताते हैं कि अदिल का व्यवहार इतना सामान्य था कि किसी को भी शक करने का मौका नहीं मिला। वह गले मिलकर हालचाल पूछता, मरीजों का इलाज पूरी लगन से करता और अस्पताल की ओपीडी व आईपीडी दोनों को बेहतर तरीके से संभालता था। डॉक्टर मनोज कहते हैं— “इतना स्किल्ड व्यक्ति अचानक Lal Kila Blast Case जैसा मामला कैसे कर सकता है, ये आज भी समझ नहीं आता।”

अस्पताल में कश्मीरी डॉक्टरों को लाने की कोशिश

अदिल ने कई बार अपने कश्मीरी दोस्तों को अस्पताल में भर्ती करने का अनुरोध किया। उसने खासकर एक सर्जन को रखने का दबाव डाला, जबकि उसी पद पर डॉक्टर अंकुर पहले से मौजूद थे। डायरेक्टर मनोज बताते हैं कि अदिल पीडियाट्रिक्स, कार्डियोलॉजी और अन्य विभागों के लिए भी अपने परिचित डॉक्टरों को लाने की बात करता था। उस समय यह बातें सामान्य लगीं, लेकिन अब Lal Kila Blast Case सामने आने के बाद सब अलग नजर आता है।

रहने की जगह को लेकर अदिल का संदेह भरा व्यवहार

अस्पताल ने अदिल को 2BHK फ्लैट ऑफर किया, जैसा कि बाकी डॉक्टरों को दिया गया है। लेकिन अदिल ने इसे ठुकरा दिया और कहा कि उसे एकांत सरीखी जगह चाहिए। अस्पताल ने होटल में रहने की पेशकश भी की, लेकिन अदिल ने वह भी मना कर दिया। डायरेक्टर कहते हैं कि अब लगता है कि वह जानबूझकर अकेले रहना चाहता था, जो आगे चलकर Lal Kila Blast Case के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संकेत साबित हुआ।

कश्मीरी डॉक्टरों की मौजूदगी और संदेह न होने का कारण

अस्पताल में पहले भी कश्मीरी डॉक्टर काम कर चुके हैं, इसलिए अदिल को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं था। डायरेक्टर का कहना है कि धारा 370 हटने के बाद परिस्थितियाँ बदल रही थीं और कश्मीर से डॉक्टर देश के दूसरे राज्यों में काम करने लगे थे। इस माहौल में अदिल का आना बिल्कुल सामान्य लगा, और इस वजह से Lal Kila Blast Case का अंदाज़ा लगाना मुश्किल था।

5 नवंबर: जब शक की शुरुआत हुई

डॉक्टर मनोज बताते हैं कि 5 नवंबर को पहली बार कुछ गलत लगा। अदिल ने कहा कि उसकी तबीयत खराब है और वह डायलिसिस मरीजों को नहीं देख पाएगा। थोड़ी देर बाद उसने बताया कि उसकी मां की तबीयत बहुत खराब है और उसे श्रीनगर जाना है। उसने स्टाफ से अनुरोध किया कि उसे सरसावा तक छोड़ दें ताकि वह वहां से चंडीगढ़ की बस पकड़ सके। उसी शाम प्रबंधन ने डायरेक्टर को बताया कि अदिल को SOG और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डिटेन कर लिया है। यह सुनकर अस्पताल प्रबंधन को लगा कि मामला गंभीर है और अब Lal Kila Blast Case उन तक सीधे पहुंच गया है।

परिवार से संपर्क और चौंकाने वाली बातें

डायरेक्टर मनोज बताते हैं कि अदिल के परिवार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कई नंबर बंद मिले। अंत में एक ‘अंकल’ से बात हुई, जिन्होंने बताया कि अदिल अलगाववादी विचारधारा से प्रभावित था और परिवार उसे कई बार समझा चुका था। यही बात डायरेक्टर को Lal Kila Blast Case की कड़ियों को समझने में मदद करती है। उन्होंने बताया कि अदिल का एक भाई भी कट्टरपंथी विचारों से जुड़ा हुआ है और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा दान कर देता था।

संदिग्ध पार्सल का सवाल और अस्पताल की सफाई

अस्पताल में किसी संदिग्ध पार्सल की जानकारी नहीं है। हां, डॉक्टर अनन्या ने Amazon का एक पार्सल रिसीव किया था, जिसमें क्या था यह स्पष्ट नहीं हो पाया। डायरेक्टर का कहना है कि सोशल मीडिया पर कई तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन अस्पताल का Lal Kila Blast Case से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उनका कहना है कि अदिल की असल पहचान को छिपाया गया था और अस्पताल को इसका अंदाज़ा नहीं था।

अस्पताल की छवि और रोजगार पर असर

डॉक्टर मनोज बताते हैं कि इस घटना ने अस्पताल की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सोशल मीडिया पर टिप्पणियों में अस्पताल पर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे 100 परिवारों की रोज़ी-रोटी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथ किसी का नहीं होता, लेकिन इस तरह की घटनाएं समाज में अविश्वास पैदा करती हैं। इस पूरे Lal Kila Blast Case ने उन्हें पूरी तरह हिला दिया है।

Lal Kila Blast Case का बड़ा सबक

यह मामला दर्शाता है कि किस तरह एक वाइट कॉलर नेटवर्क के जरिए Lal Kila Blast Case को आगे बढ़ाया जा रहा था। डॉक्टर जैसे सम्मानित पेशे में काम करने वाला व्यक्ति इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकता है, यह समाज के लिए बड़ा खतरा है। जांच एजेंसियां अब Lal Kila Blast Case की तह तक जाने में जुटी हैं, लेकिन अस्पताल और उससे जुड़े लोगों के लिए यह घटना हमेशा एक सदमे की तरह रहेगी।

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