संसद में हंगामे की वजह बनी किताब: Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy पर क्यों गरमाया लोकसभा का माहौल

लोकसभा में सोमवार को उस वक्त माहौल अचानक गरमा गया, जब नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने अपने भाषण के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का हवाला देना शुरू किया। देखते ही देखते यह मुद्दा Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy में बदल गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। हालात इतने बिगड़ गए कि लोकसभा की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा।

किताब से शुरू हुआ विवाद

राहुल गांधी ने लोकसभा में बोलते हुए एक पत्रिका का प्रिंटआउट हाथ में लिया, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आने वाली किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी से जुड़ा एक लेख छपा था। यह किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन लेख में 2020 में लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर हुए टकराव का जिक्र है। जैसे ही राहुल गांधी ने उस लेख से कुछ पंक्तियां पढ़नी शुरू कीं, Rajnath Singh ने तुरंत आपत्ति जता दी।

रक्षामंत्री ने कहा कि किसी अप्रकाशित किताब को सदन में उद्धृत करना नियमों के खिलाफ है। यहीं से Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy ने तूल पकड़ लिया।

2020 का लद्दाख तनाव फिर चर्चा में

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव मई 2020 में उस वक्त बढ़ा था, जब पैंगोंग झील इलाके में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना ने भारत-चीन संबंधों में गंभीर तनाव पैदा किया था। जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब में इसी दौर से जुड़े अनुभवों का जिक्र बताया जा रहा है।

राहुल गांधी का कहना था कि वह सेना को बदनाम नहीं कर रहे हैं, बल्कि सेना प्रमुख की ही बातों को सदन के सामने रख रहे हैं। लेकिन सत्ता पक्ष ने इसे बिल्कुल अलग नजरिये से देखा और यहीं से Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy और तेज हो गई।

सत्ता पक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बाद गृह मंत्री Amit Shah और संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju भी राहुल गांधी पर सवाल उठाने लगे। अमित शाह ने पूछा कि जब किताब अभी छपी ही नहीं है, तो उसे संसद में कैसे पढ़ा जा सकता है।

किरण रिजिजू ने तो यहां तक कहा कि ऐसे सदस्य पर चर्चा होनी चाहिए जो स्पीकर के निर्देशों का पालन नहीं करता। इन बयानों के बाद सदन में शोर और बढ़ गया और Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy पूरी तरह हावी हो गई।

राहुल गांधी का पलटवार

लगातार हो रहे विरोध के बीच राहुल गांधी ने कहा, “अगर इसमें कुछ गलत नहीं है, तो फिर इसे पढ़ने देने में डर क्यों लग रहा है?” उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस लेख का वह हवाला दे रहे हैं, वह पूरी तरह प्रमाणिक है।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा उनकी और कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाने के बाद उन्हें जवाब देना पड़ा। इस बयान के बाद Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy और ज्यादा राजनीतिक रंग लेने लगी।

विपक्ष का समर्थन

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि चीन से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील है और नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। विपक्ष का तर्क था कि संसद चर्चा के लिए होती है, न कि किसी मुद्दे को दबाने के लिए।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी अपने भाई का बचाव करते हुए कहा कि राहुल गांधी सेना को बदनाम नहीं कर रहे थे, बल्कि सेना प्रमुख की किताब से जुड़ा अंश पढ़ रहे थे। उनके मुताबिक, जब भी कोई असहज सवाल उठता है, तो भाजपा इसी तरह की प्रतिक्रिया देती है। यह बयान भी Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy का हिस्सा बन गया।

सरकार की ओर से आरोप

सरकारी सूत्रों ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि सदन के पटल पर मनगढ़ंत या अप्रकाशित तथ्यों को पढ़ना खतरनाक परंपरा को जन्म दे सकता है। सूत्रों ने यह भी कहा कि कल को कोई भी सदस्य किसी काल्पनिक किताब का हवाला देकर दूसरों पर आरोप लगा सकता है।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि राहुल गांधी ने संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। इन आरोपों के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया और Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy संसद की कार्यवाही पर भारी पड़ने लगी।

लोकसभा स्थगित

लगातार शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। हालांकि, जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तो हालात में ज्यादा बदलाव नहीं आया।

राहुल गांधी ने फिर से जनरल नरवणे की किताब का जिक्र करना शुरू किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने एक बार फिर आपत्ति जताई। नतीजतन, कार्यवाही को दोबारा स्थगित करना पड़ा। इस तरह पूरा दिन Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy की भेंट चढ़ गया।

राजनीति और संसद की मर्यादा

यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि कैसे एक किताब का जिक्र संसद में बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया। एक तरफ विपक्ष इसे सवाल उठाने का अधिकार बता रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार इसे नियमों और मर्यादा से जोड़कर देख रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy सिर्फ एक भाषण तक सीमित नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि भारत-चीन संबंध, सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा कितनी संवेदनशील हो गई है।

आगे क्या?

अब सवाल यह है कि क्या इस विवाद के बाद सदन में इस मुद्दे पर शांतिपूर्ण चर्चा हो पाएगी या नहीं। फिलहाल इतना साफ है कि Rahul Gandhi Rajnath Singh Ladakh controversy ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस पूरे प्रकरण से कोई ठोस चर्चा निकलती है या यह भी संसद के शोरगुल में दबकर रह जाता है। लेकिन इतना तय है कि यह विवाद लंबे समय तक सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना रहेगा।

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