Sulakshana Pandit Death: 68 की उम्र में बॉलीवुड की मशहूर सिंगर और एक्ट्रेस ने कहा अलविदा

बॉलीवुड की जानी-मानी गायिका और अभिनेत्री Sulakshana Pandit का निधन हो गया है। 68 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के नानावटी अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनके भाई और मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर Lalit Pandit ने इस दुखद खबर की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि Sulakshana Pandit death गुरुवार शाम करीब 8 बजे हार्ट अटैक के कारण हुई। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार (7 नवंबर) को दोपहर 12 बजे किया जाएगा।

फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों में Sulakshana Pandit death की खबर से शोक की लहर दौड़ गई है। कई कलाकारों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त किया है। लोगों ने उन्हें भारतीय सिनेमा और संगीत जगत की एक सादगीभरी और प्रतिभाशाली कलाकार के रूप में याद किया है।

1970 के दशक की जानी-मानी एक्ट्रेस

Sulakshana Pandit death ऐसे समय हुआ है जब उनका नाम आज भी 70 के दशक की फिल्मों में याद किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1975 में आई फिल्म Uljhan से की थी, जिसमें उनके साथ संजीव कुमार थे। यह फिल्म एक सस्पेंस थ्रिलर थी और यहीं से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई।

इसके बाद उन्होंने Sankoch, Apnapan, Hera Pheri, Khandaan, Chehre Pe Chehra, Dharam Kanta और Waqt Ki Deewar जैसी कई फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड की प्रमुख अभिनेत्रियों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया।

Sulakshana Pandit death के बाद उनके साथ काम कर चुके कई कलाकारों ने कहा कि वह स्क्रीन पर बहुत नैचुरल लगती थीं। उन्होंने उस दौर के लगभग हर बड़े सितारे जैसे जितेंद्र, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा के साथ काम किया।

बंगाली सिनेमा में भी दिखाई प्रतिभा

1978 में उन्होंने बंगाली फिल्म Bandie में काम किया, जिसमें उनके अपोजिट बंगाल के लेजेंडरी एक्टर उत्तम कुमार थे। इस फिल्म ने यह साबित कर दिया कि Sulakshana Pandit सिर्फ हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उनके अभिनय में भाषा की कोई दीवार नहीं थी।

गाने की शुरुआत लता मंगेशकर के साथ

कम ही लोग जानते हैं कि Sulakshana Pandit ने अपने करियर की शुरुआत बतौर सिंगर की थी। उन्होंने बचपन में लता मंगेशकर के साथ फिल्म Taqdeer (1967) के लिए ‘Saat Samundar Paar Se’ गाना गाया था।

इसके बाद उन्होंने किशोर कुमार, मोहम्मद रफ़ी, हेमंत कुमार और येसुदास जैसे दिग्गजों के साथ कई यादगार गाने गाए। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ बंगाली, मराठी, उड़िया और गुजराती भाषाओं में भी गाने रिकॉर्ड किए।

1980 में निकला एल्बम ‘Jazbaat’

उनकी आवाज़ की मिठास और भावनाओं की गहराई को लोग आज भी याद करते हैं। 1980 में उन्होंने अपना एल्बम Jazbaat रिलीज़ किया था, जिसमें उनके गज़ल गाने विशेष रूप से चर्चित रहे। Sulakshana Pandit death के बाद यह एल्बम फिर से सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है, क्योंकि उस दौर में यह युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय था।

म्यूजिक डायरेक्टरों की पसंदीदा गायिका

Sulakshana Pandit ने अपने करियर में लगभग हर बड़े संगीतकार के साथ काम किया। उन्होंने शंकर-जयकिशन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, कल्याणजी-आनंदजी, बप्पी लाहिड़ी, राजेश रोशन, खय्याम और राजकमल जैसे दिग्गजों के लिए गाने गाए।

उनके कुछ लोकप्रिय गीत आज भी रेडियो और यूट्यूब पर सुनाई देते हैं। खासकर 70 और 80 के दशक में उनकी आवाज़ फिल्मों की पहचान बन गई थी।

Royal Albert Hall में दी थी परफॉर्मेंस

1986 में उन्होंने लंदन के Royal Albert Hall में आयोजित “Festival of Indian Music” में परफॉर्म किया था। यह उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी क्योंकि वहां केवल चुनिंदा भारतीय कलाकारों को ही प्रस्तुति का मौका मिलता था।

Jatin-Lalit की बहन थीं Sulakshana

Sulakshana Pandit death से उनके परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है। वह मशहूर संगीतकार जोड़ी Jatin-Lalit की बहन थीं और अभिनेत्री Vijeta Pandit की भी सगी बहन थीं। परिवार हमेशा संगीत और सिनेमा से जुड़ा रहा है।

उनका आखिरी रिकॉर्ड किया गया योगदान 1996 की फिल्म Khamoshi: The Musical में था, जिसमें उन्होंने ‘Saagar Kinare Bhi Do Dil’ गाने में आलाप दिया था। इस गाने के संगीतकार उनके भाई Jatin-Lalit थे।

सादगी और संवेदना की मिसाल

Sulakshana Pandit death के बाद इंडस्ट्री में यह चर्चा है कि वह हमेशा एक सादगीभरी और भावनात्मक कलाकार रहीं। उन्होंने कभी ग्लैमर की दौड़ में खुद को नहीं झोंका। उनके करीबी बताते हैं कि वह बेहद शांत और पारिवारिक स्वभाव की थीं।

उनकी जिंदगी के आखिरी कुछ साल बीमारी में गुज़रे। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं, लेकिन परिवार और कुछ करीबी दोस्तों के अलावा किसी को इसकी जानकारी नहीं थी।

संगीत और सिनेमा की दुनिया को बड़ा नुकसान

Sulakshana Pandit death न केवल एक परिवार बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने अभिनय और गायन दोनों से 70 और 80 के दशक के भारतीय सिनेमा में एक खास पहचान बनाई।

उनकी जर्नी इस बात की मिसाल है कि प्रतिभा और सादगी एक साथ चल सकते हैं। आज भी उनके गाने सुनकर उस दौर की सादगी, संगीत की गहराई और बॉलीवुड का सुनहरा समय याद आ जाता है।

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